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निर्मल मन वाला जीव भगवान का प्रिय : संत मदन गोपाल

7 वर्ष पहले
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अग्रसेनभवन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन शनिवार को संत मदन गोपाल ने गोपियों को बारे में बताया। उन्होंने गोपी शब्द का अर्थ बताते हुए कहा कि गो का अर्थ इंद्री पी का अर्थ है पीना। अर्थात् जो अपनी इंद्रियों से भागवत रस का पान करता है, उसे गोपी कहते है।

गोपियां घर के सभी कार्यों को करते हुए भी अपना ध्यान भगवान श्रीकृष्ण में लगाए रखती हैं। माखन भी अपने कन्हैया के लिए ही बनाती है। सभी कार्य करते हुए मन कृष्ण में लगाए रखती है। इसलिए भागवत में भक्ति मार्ग का आचार्य गोपियों को बताया गया है। जो गोपियां भगवान की लीलाओं में शामिल हैं। वह सभी वेद की उपासना कंठ के 16 हजार मंत्र और 108 उपनिषद् है। एवं जो रामावतार में जनकपुर की नारियां भगवान को झरोखे से दर्शन करना चाहती है। वह सब गोपियों के रूप में आकर भगवान की लीलाओं में शामिल होती है। इसके अलावा ऋषि, महर्षि सिद्ध योगी भी भगवान की लीलाओं मे शामिल होते हैं। महाराज ने बताया की भगवान की लीलाओं में निर्मल मन वाला जीव ही शामिल हो सकता है। वहीं भगवान के दर्शन कर पाते है। छल कपट वाला व्यक्ति तो भगवान के दर्शन स्वप्न में भी नहीं कर पाता है। उन्होंने कहा कि रुक्मिणी और कृष्ण का प्रथम विवाह हुआ। रुक्मिणी रामावतार की सीता है जो साक्षात महालक्ष्मी का अवतार है। कथा के दौरान राधा-कृष्ण की झांकियां दिखाई गई।