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रघुकुल रीति सदा चलि आई, प्राण जाए पर वचन जाई...

7 वर्ष पहले
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पुरानागवर्नमेंट कॉलेज मैदान में श्री रामलीला कटला कमेटी की ओर करवाई जा रही 117वीं रामलीला मंचन के दौरान राधा विनोद लीला संस्थान वृंदावन से पधारे कलाकारों ने छठे दिन सोमवार को दशरथ कैकेयी संवाद, मंथरा कैकेयी संवाद, राम वनवास, राम केवट संवाद दिखाया गया।

दशरथ कैकेयी संवाद में दिखाया गया कि जब राजा दशरथ राम को राजपाट सौंपना चाहते है तब कैकेयी आकर उनसे दो अपने वचन मांगती है जो राजा ने उन्हें युद्ध के दौरान अपनी जान बचाने के बाद दिए थे। राजा वचन देने के लिए हां कर देते है तो कैकेयी ने पहला वचन राम की जगह भरत का राजतिलक होना और दूसरा राम को चौदह साल का वनवास दिया जाए। यह बात सुनकर राजा दशरथ को सदमा लगता है और वह अपने प्रिय पुत्र राम को अपने से दूर नहीं जाने देना चाहते थे। परंतु राम को जब इस बात का पता चलता है तो राम अपने पिता को समझाते है कि रघुकुल रीति सदा चलि आई, प्राण जाए पर वचन जाई...। यह बात कहकर राम अपने पिता दशरथ के वचन की लाज रखते हुए वन की ओर चले जाते है। कैकेयी और मंथरा संवाद में दिखाया कि कैसे मंथरा को राम का राजा बनना पंसद नहीं आया और वह राम के राजा बनने पर वह कैकेयी को अपनी बातों में उलझा कर वचन लेने के लिए कहती है। इस मौके पर वीर बान बंसल, सज्जन गुप्ता, सनत बिंदल, पंकज गर्ग, बजरंग सिंगल, अशोक शर्मा, राजेश शर्मा, कुलदीप गुप्ता, सतीश बंसल, अश्वनी शर्मा, ललित गोयल विनोद अग्रवाल आदि मौजूद रहे। उधर, न्यू मॉडल टाउन में भी रामलीला के दौरान दशरथ कैकेयी संवाद, मंथरा कैकेयी संवाद, राम वनवास, राम केवट संवाद का मंचन किया गया।

पुराना गवर्नमेंट कॉलेज मैदान में रामलीला का मंचन करते कलाकार।