वैदिक संस्कृति असली संस्कृति : गंगवा
गुरुकुलधीरणवास का दो दिवसीय 43वां वार्षिक महोत्सव शनिवार को वैदिक हवन-यज्ञ ध्वजारोहण के साथ शुभारंभ हुआ। इसमें गुरुकुल शिक्षा पद्धति को बढ़ावा देने के साथ-साथ वैदिक संस्कृति को अपनाने पर बल दिया गया।
महोत्सव की शुरुआत गुरुकुल के कुलपति एवं संस्थापक स्वामी सर्वदानंद सरस्वती और नलवा विधायक रणबीर गंगवा ने की। इस दौरान विधायक ने कहा कि हमारी असली संस्कृति वैदिक संस्कृति है, जिसका अनुसरण आज केवल गुरुकुलों में ही किया जा रहा है। जहां हर रोज हवन होते हो, वेद मंत्र बोले जाते हो, वैदिक ज्ञान दिया जाता हो, वह स्थान सबसे पवित्र स्थान होता है। ऐसे स्थानों में एक गुरुकुल धीरणवास भी शामिल है। दोपहर के समय भजनों प्रवचनों का कार्यक्रम शुरू हुआ। सार्वदेशिक सभा दिल्ली के प्रधान स्वामी आर्यवेश ने कहा कि आज हमें चिंतन करना है कि देश किस ओर जा रहा है। देश की तरक्की के लिए आध्यात्मिक सामाजिक उन्नति की आवश्यकता है। वह वैदिक वर्ण आश्रम पद्धति अपनाकर ही पा सकते हैं। ऐसा करने पर देश को हर दृष्टिकोण से संपन्न खुशहाल बनाकर पूरे विश्व में सर्वोपरि बना सकते हैं। विशिष्ट अतिथि के रूप में इनेलो के राष्ट्रीय सचिव युद्धवीर सिंह आर्य जांडवाला उपस्थित हुए। ध्वजारोहण गुरुकुल के प्रधान इंद्रजीत आर्य ने किया। आर्य समाज हिसार के प्रधान बदलूराम आर्य, स्वामी कृष्णानंद, आचार्य रामस्वरूप शास्त्री, दीक्षेंद्र आर्य, आनंद मुनि तथा भजनोपदेशक रामनिवास आर्य, बहन संगीता आर्या आर्य नगर से कल्याणी आर्या ने भी कार्यक्रम प्रस्तुत किया। इस मौके पर प्रेस प्रवक्ता सत्यपाल अग्रवाल, मेजर करतार सिंह, जगदीश चंद्र आर्य, भगत देवराज एडवोकेट, बजरंगलाल गोयल मुकलानिया, नंदराम सांगवान, बलबीर चौधरी कसबां, शोभाचंद आर्य, सेठ ताराचंद आर्य मा. दलीप सिंह आर्य आदि मौजूद रहे।
गुरुकुल धीरणवास के वार्षिक महोत्सव में उपस्थित लोग और विधायक रणबीर गंगवा को सम्मानित करते गुरुकुल के पदाधिकारी।