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अड़चनों ने बिगाड़ दी साउथ बाइपास के काम की रफ्तार

7 वर्ष पहले
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साउथबाइपास पर एक बार फिर काम अटक गया है। ठेकेदार ने रेट रिवाइज होने पर बाइपास का काम रोक दिया है। सितंबर 2011 में बाइपास का काम शुरू हुआ था, लेकिन जनवरी 2014 में अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) मिली। जबकि काम की शुरुआत में ही एनआेसी मिलनी चाहिए थी। ऐसे ही भैंस अनुसंधान केंद्र की दीवार बाइपास के रास्ते में आई। इसे तुड़वाने में संबंधित विभागों ने एनओसी मिलने के कारण देरी की। ऐसे ही सातरोड और घोड़ा फॉर्म के निकट रेलवे क्रॉसिंग आती है।

रेलवे क्रॉसिंग के दोनों ही स्थानों पर फाटकों की शिफ्टिंग को लेकर रेलवे का देरी से जवाब मिला। राजगढ़ रोड से बगला रोड तक (कुल 21.49 किमी) तक सैकड़ों की तादाद में पेड़ आए। इन पेड़ों को कटवाने के लिए वन विभाग पर्यावरण मंत्रालय से लेकर विभागों का रवैया भी संतोषजनक नहीं रहा। यह भी एक अहम कारण रहा कि काम में देरी हुई। लगातार काम में आई अड़चनों के चलते काम की लागत भी बढ़ी।

तारीख पे तारीख

नाम : साउथबाइपास

कामशुरू हुआ : 21सितंबर 2011 से

कुललंबाई : 21.49किमी

लागत: 33.48करोड़

पहलीसमय सीमा : 20सितंबर 2013

दूसरीसमय सीमा : 30जून 2014

तीसरीसमय सीमा : विभागने 30 सितंबर तय की, ठेकेदार ने नवंबर 2014

फिलहालकी स्थिति : विभागको बजट का इंतजार, ठेकेदार ने खड़े किए हाथ, काम ठप

सदन में उछला मामला

साउथ बाइपास के अटके काम का मामला विधानसभा में गूंज चुका है। नलवा के विधायक रहे प्रो. संपत सिंह ने बीते साल विधानसभा में बाइपास का निर्माण पूरा होने का मामला उठाया तो तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री रणदीप सुरजेवाला ने पिछले साल विधानसभा में भरोसा दिलाया था कि 30 जून 2014 तक काम पूरा होने का आश्वासन दिया था। हालांकि काम की तारीख के साथ सरकार भी बदल गई, लेकिन काम अभी भी अधर में।