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दूसरे राज्यों पर टिका लुवास का फिश काॅलेज
लालालाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय ने भले ही फिश कालेज निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेज दिया हो, लेकिन फिश कालेज के निर्माण से पहले दूसरे राज्यों की वास्तुस्थिति को भांपा जा रहा है। फिश काॅलेज को लेकर विद्यार्थियों का रुझान कैसा है और काॅलेज से निकलने वाले विज्ञानियों का भविष्य कैसा रहेगा इसके लिए दूसरों राज्यों से डाटा जुटाया जा रहा है।
प्रदेश के एकमात्र पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय ने कुछ समय पहले शासन को फिश कालेज के निर्माण का प्रस्ताव भेजा था। इसकी प्रक्रिया शासन स्तर पर विचाराधीन है, लेकिन उससे पहले लुवास प्रबंधन फिश को लेकर पूरी जानकारी जुटाना चाहता है। काॅलेज निर्माण से पहले ऐसे राज्यों की नब्ज टटोली जा रही है जिसमें या तो फिश काॅलेज हो या फिर वहां पर फिश का बड़े पैमाने पर कारोबार होता है। इसके लिए लुवास प्रबंधन मद्रास, आंध्र प्रदेश और बंगाल आदि राज्यों से डाटा इकट्ठा कर रहा है। इसमें देखा जा रहा है कि फिश को लेकर विद्यार्थियों में क्या रुझान और विज्ञानियों का भविष्य कैसा रहेगा। काॅलेज से निकलने वाले विज्ञानियों को कहीं नौकरी मिल सकती है या फिर नहीं। इन सब पहलुओं को जांचने के बाद ही फिश कालेज निर्माण का कदम उठाया जाएगा।
^फिश कालेज निर्माण का प्रस्ताव शासन स्तर पर प्रक्रिया में है, लेकिन उससे पहले दूसरे राज्यों से डाटा इकट्ठा किया जा रहा है।\\\'\\\' डाॅ.एमएस यादव, डायरेक्टरस्टूडेंट वेलफेयर कम स्टेट आॅफिसर लुवास
फिश पर होती है रिसर्च
फिश कालेज में विद्यार्थियों को नियमित रूप से पाठयक्रम के माध्यम से नई-नई जानकारी दी जाती है। इसके अलावा फिश पर तमाम रिसर्च भी कराई जाती है। फिश कालेज के माध्यम से मछली पालन को भी बढ़ावा दिया जाता है।