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गायब होते जा रहे कौए, कैसे हो श्राद्ध

7 वर्ष पहले
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कौओं को क्यों दिया जाता है भोजन

पंडितदेव शर्मा के अनुसार कौओं को यम का दूत माना गया है इसलिए कौओं को भोजन करवाया जाता है अगर कौओं भोजन कर लेते है तैर माना गया है कि मनुष्य के पितर प्रसन्न हो गए है पितरों को खाना खिलाने से पहले सर्वप्रथम पंच वली निकाली जाती है। इसमें सबसे पहले गाय को भोजन खिलाया जाता है, इसके बाद कुत्ते को फिर देव बली, काग बली और अंत चीटियों को खाना दिया जाता है ऐसा करने से भोजन शुद्ध हो जाता है पंच वली के लिए अग्नि में आहुति डाली जाती है ओर पितरों के नियमित भोजन निकाला जाता है।

भास्कर न्यूज | हिसार

उड़जा काले कावां तेरे मुह विच खंड पांवां...पर संदेश देने के लिए खंडा खिलाने की बात तो दूर अब तो पूरा भोजन कराने का आग्रह करने पर भी कौए नहीं आते। आएं कैसे। जब होंगे तो तब आएंगे न। पितृपक्ष चल रहा है। श्राद्ध के पितरों को भोजन कराने की सनातन परंपरा है। कहा जाता है कि यदि कौए भोजन कर लेते हैं तो पितरों की आत्मा संतुष्ट हो जाती है। पर कौए लुप्त होते जा रहे हैं। इसका कारण बताते हुए डॉ. ऋषि तायल ने बताया की अगर कौओं पशुओं का मांस खाते है। तो पशुओं को डिप्लोमेट नामक दवाइयां दी जाती है जो हानिकारक होती है कोई अन्य जानवर इन पशुओं का मांस खाता है तो वह भी मर जाता है।

वन विभाग की डीएफओ निवेदिता भोजराजन कहती हैं कि इसके पीछे पर्यावरण का प्रदूषित होना भी बड़ी वजह है। अब लोग पेड़ पौधे लगाते ही नहीं। पेड़ कम होने के कारण कौए ही कम नहीं हो रहे है दूसरे पक्षी भी लुप्त होतो जा रहे है।