वो आखिरी चरण तक धड़कन बढ़ाने वाले मुकाबले
पिछलेचुनाव के नजदीकी मुकाबले इस चुनाव में भी प्रत्याशियों की धड़कनें बढ़ा रहे हैं। दरअसल, चंद वोटों से जीते प्रत्याशियों को मालूम है कि जीत तो गए थे, लेकिन हारते-हारते मुश्किल से बचे। वहीं, हारे हुए प्रत्याशी को लग रहा है कि पिछली बार जहां कमी रही उसे दूर कर देंगे। भले ही इस बार जीत का दावा कर रहे हों, पर एक-एक वोट के लिए पसीना बहा रहे हैं।
विधानसभा के पिछले चुनाव में 17 सीटों पर जीत का अंतर 3000 से कम रहा। 12 सीटों पर कांग्रेस के प्रत्याशी अपने प्रतिद्वंद्वियों से हारे, वहीं इनेलो के 9 प्रत्याशी जीतने में कामयाब हुए थे। भाजपा के 4 में से 3 विधायक कम अंतर से जीत पाए थे। इनमें ितगांव से कृष्णपाल गुर्जर, भिवानी से घनश्याम सर्राफ और सोनीपत से कविता जैन के नाम शािमल हैं।
145
505
621
वोटों से जीते थे दादरी से सतपालसांगवान
वोटों से जीते थे सोहना से
धर्मवीर
वोटों से जीते थे उचाना से ओमप्रकाशचौटाला
एक हलका ऐसा भी तीन बार न्यूनतम वोट से जीत
घरौंडामें 1968 में बीजेएस पार्टी के रणधीर सिंह ने एसडब्ल्यूए के रूलेराम को मात्र 12 वोट से, 1996 में भाजपा के रमेश ने समता पार्टी के जगपाल सिंह को 11 वोट से और 2005 के चुनाव में इनेलो की रेखा राणा ने आजाद उम्मीदवार जयपाल शर्मा को महज 21 वोटों से हराया था।
लोहारू : जीतके बावजूद इनेलो ने इस सीट से धर्मपाल ओबरा की जगह पर बड़वा गांव के ओमप्रकाश गौरा को टिकट दिया है। श्योराण खाप के वर्चस्व वाली बाढ़डा सीट पर बाकी दलों ने प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं। भाजपा में हाल ही शामिल हुए जेपी दलाल और पूर्व शिक्षा मंत्री बहादुर सिंह में से एक को टिकट मिल सकता है। पिछली बार दलाल दूसरे नंबर पर रहे थे। कांग्रेस के सोमबीर सिंह को दोबारा टिकट मिल सकता है, हालांकि मंत्री किरण चौधरी ने अपनी बेटी श्रुति चौधरी के लिए दावेदारी करके सभी समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है।
बाढड़ा : कर्नलरघुबीर छिल्लर एक बार फिर इनेलो के टिकट पर मैदान में हैं। अन्य किसी दल ने अभी यहां पर टिकट की घोषणा नहीं की है। रणबीर महेंद्रा एक बार फिर इस सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। वह पिछले डेढ़ महीने से हलके में सक्रिय हैं। भाजपा से सुखविंद्र मांडी के अलावा नृपेंद्र सिंह अाैर सत्यवार शास्त्री टिकट की जुगत में हैं।
दादरी : हजकांके टिकट पर चुनाव जीत कर कांग्रेस के पाले में ग