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राजनेताओं की सोच अंग्रेजों से मिलती है : डॉ. जुनेजा

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | फतेहाबाद/हिसार

विभिन्नजनसंगठनों के मंच ने फतेहाबाद के पटवार भवन में संगोष्ठी की। इसके मुख्य वक्ता पूर्व अध्यक्ष इतिहास विभाग, जाट कॉलेज हिसार डाॅ. एमएम जुनेजा थे। गोष्ठी मेें 6 दिसंबर 1992 को कुछ साम्प्रदायिक शक्तियों द्वारा बाबरी मस्जिद को गिराए जाने की घटना पर चर्चा की गई।

जुनेजा ने कहा कि मस्जिद गिराया जाना यह एक अहम घटना थी। क्योंकि हमारा संविधान इस बात की गारंटी देता है कि भारत का हर नागरिक अपनी अपनी इच्छा के अनुसार कोई भी धर्म चुन सकता है। किसी भी रीति-रिवाज से पूजा पाठ कर सकता है। 6 दिसंबर को जहां हमारे देश में रहने वाले एक विशेष धर्म के लोगों को इस बात से ठेस पहुंची वहां पर हमारी संवैधानिक मर्यादाओं का भी उल्लंघन हुआ। इत्तफाक से 6 दिसंबर भारत को संविधान के निर्माता डाॅ. भीमराव अांबेडकर का भी निर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि 1927-28 तक भारत के अनेक भागों में दंगे हुए। ठीक इसी समय भगत सिंह और उनके साथियों ने इस खतरे को देखते हुए आजादी को क्रांतिकारी और समाजवादी उद्देश्यों की पूर्ति के लिए दिशा दी और सांप्रदायिकता को ऊपर लेख लिखे।

उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भी अपने राजनेताओं की सोच अंग्रेजों से मिलती हुई लगती है और वोट के लिए जाति-धर्म का कार्ड खेलते है जिसका नतीजा दंगे होते हैं और आम आदमी मारा जाता है। गोष्ठी का मंच संचालन मोहन लाल नारंग ने किया। कामरेड हरनाम सिंह ने भी आज के आने वाले खतरों के बारे में बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भरत सिंह परिहार एडवोकेट ने की।