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जान के दुश्मन बने मोबाइल टाॅवर

7 वर्ष पहले
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{ऑटो मार्केट के निवासियों ने विरोध किया

भास्करन्यूज | हिसार

शहरमें जगह-जगह लगे मोबाइल टावर लोगों की जान के दुश्मन बने हुए हैं। शहर में कुछेक टावर तो आवासीय कॉलोनियों के बीचों-बीच लगाए गए हैं जबकि, नगर निगम अधिकारी टावर लगाने वाली कंपनियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। टावरों से निकलने वाली विकिरणों के कारण लोग कैंसर जैसी लाइलाज बीमारियों तक की चपेट में रहे हैं।

मार्च-अप्रैल 2013 में मोबाइल टावर से निकलने वाली विकिरणों के संपर्क में रहने के कारण जयपुर में तीन लोगों की मौत हो गई थी। तीन लोगों की मौत होने पर सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप किया था तथा सभी मोबाइल टावर आवासीय क्षेत्र से दूर लगाने के आदेश दिए थे। ऑटो मार्केट में ये समस्या लंबे समय से बनी हुई है।

^मेरे संज्ञान में मामला अा चुका है, मंगलवार को जांच टीम मौके पर भेजेंगे। अनुमति से लेकर संबंधित दस्तावेज देखे जाएंगें। साथ ही हम कार्रवाई भी सुनिश्चित करेंगे।\\\'\\\'

अरविंदकुमार बिश्नोई, ईओ,नगर निगम

सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट के सख्त आदेशों के बावजूद भी मोबाइल टावरों को शहर की आवासीय कॉलोनियों से बाहर नहीं किया जा रहा है। प्रशासन की यह लापरवाही लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। स्वास्थ्य विभाग भी इस मामले में सुस्ती दिखा रहा है।

अॉटो मार्केट में टाॅवर लगाने का विरोध करते निवासी।

टाॅवर लगने से ये होती हैं बीमारियां

चिकित्सकों की माने तो ज्यादा देर तक मोबाइल टावर की विकिरणों के संपर्क में रहने से स्किन कैंसर, मानसिक परेशानी, दिल की धड़कन बढ़ना तथा प्रजनन क्षमता का कम होना मुख्य हैं। इसके अलावा त्वचा संबंधी बीमारियां खुजली, खारिश, दाद त्वचा में सूखापन जाता है।

मोबाइल टावरों से पक्षियों को भी परेशानी होती है। टावरों की विकिरणों के कारण पक्षियों खासकर गौरिया का स्वास्थ्य भी बुरी तरह प्रभावित होता है। इसीलिए वो ज्यादा टावरों वाले क्षेत्र से पलायन कर जाते हैं।

ऑटो मार्केट निवासी रणजीत सिंह, गुरप्रीत, सुरेंद्र चड्डा, संचित, सोनू, राजीव आदि ने बताया कि करीब एक वर्ष पूर्व ज्ञानचंद चड्डा निवासी एक व्यक्ति की मोबाइल टावर से निकलने वाली विकिरणों से मौत हो गई थी। उन्होंने बताया कि यहां करीब 6-7 मोबाइल टावर लगे हुए हैं, जिस कारण उन्हें सांस लेने में दिक्कतें होती है।