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31 घंटे के बाद हुई गर्भ में मृत बच्चे की डिलीवरी, हंगामा

6 वर्ष पहले
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सिविलअस्पताल प्रशासन की मरीजों को लेकर लापरवाही की घटनाएं लगातार सामने रही हैं। आए दिन कोई कोई नया मामला सामने रहा है। गर्भ में मृत बच्चे को लेकर अस्पताल में उपचार के लिए आई महिला की डिलीवरी लापरवाही की वजह से 31 घंटे के बाद हुई। जबकि महिला को शनिवार सुबह ही सिविल अस्पताल में भर्ती करा दिया गया था। डॉक्टरों ने महिला के गर्भ में बच्चे के मृत होने के बावजूद उसे सोमवार को डिलीवरी की तारीख थमा दी थी। इसके बाद रविवार को देर शाम 7.35 बजे महिला की डिलीवरी हुई।

डॉक्टरोंने पहले दिन भेज दिया था घर

पहलेदिन डॉक्टरों ने अवकाश के चक्कर में महिला को दो दिन बाद अस्पताल में आने के लिए कह दिया था। जब महिला गंभीर हालत में घर पहुंची तो वह बेहोश हो गई। इसके बाद परिजन दोबारा उसे लेकर सिविल अस्पताल आए। यहां काफी देर हुए हंगामे के बाद महिला को भर्ती किया गया। इसके बाद भी महिला को प्राथमिक उपचार नहीं दिया गया।

कईमामलों में बरती लापरवाही

सिविलअस्पताल में इससे पहले भी कई मामलों में लापरवाही बरती जा चुकी है। करीब छह महीने पहले सिवानी की 80 फीसदी झुलसी महिला को अस्पताल प्रशासन ने भर्ती करने से इनकार कर दिया था। महिला करीब डेढ़ घंटे तक अस्पताल के गेट पर स्ट्रेचर पर पड़ी रही थी। बाद में निजी अस्पताल में महिला ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था। ऐसा ही एक मामला 10 दिन पहले सामने आया था। सिविल अस्पताल में एचआईवी पीड़ित एक महिला की डिलीवरी करने से मना कर दिया था। अस्पताल प्रशासन की आेर से कहा गया था कि उसकी डिलीवरी करीब दो महीने बाद होगी। जबकि महिला को तेज प्रसव पीड़ा हो रही थी। इसके बाद जब परिजन महिला को घर ले गए तो यहां उसने बाथरूम में बच्चे को जन्म दिया था। बाद में महिला को सिविल अस्पताल में फिर से भर्ती के लिए लाया गया तो भर्ती करने से फिर इनकार कर दिया गया। एक एएनएम के विरोध के बाद उसे भर्ती किया गया था। इसके बावजूद महिला को दाे दिनों तक प्राथमिक उपचार भी मुहैया नहीं कराया गया था।

यहहै मामला

गांवभैरियां के ईंट भट्ठे पर काम करने वाली यूपी के फर्रुखाबाद निवासी रजनी प|ी रिंकू को शनिवार सुबह को प्रसव पीड़ा होने के बाद चौधरीवास पीएचसी लाया गया। यहां गंभीर हालत होने के कारण डॉक्टरों ने उसे हिसार सिविल अस्पताल भेज दिया। सिविल अस्पताल में जब महिला का अल्ट्रासाउंड कराया गया तो सामने आया कि बच्चे की गर्भ में ही मौत हो चुकी है। इस पर परिजनों ने चिकित्सकों से महिला की डिलीवरी करने की मांग की। बाद में चिकित्सकों ने महिला को साेमवार को अस्पताल में आने के लिए कहा। विरोध के बाद डॉक्टरों ने महिला को अस्पताल में भर्ती तो कर लिया लेकिन उसे अभी तक उपचार नहीं मिला।