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जेई ने सरपंच के सिर पर फोड़ा ठीकरा

6 वर्ष पहले
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सरसौदकी वाल्मीकि बस्ती में कुएं की चारदिवारी का फर्जी एस्टीमेट बनाने की परतें खुलने लगी हैं। पंचायत विभाग के जेई सतबीर सिंह और गांव के सरपंच प्रतिनिधि ओमप्रकाश की मिलीभगत सामने आई है। दोनों अब बचाव के लिए रास्ते तलाश रहे हैं। जेई का कहना है कि ओमप्रकाश ने कुएं के साथ तलाब की चारदिवारी का एस्टीमेट भी तैयार करने को कहा था। सरपंच प्रतिनिधि सतबीर सिंह कहते हैं कि बेशक कुएं के साथ तालाब का एस्टीमेट बन गया, मगर पास तो कुएं का ही होना था। बहरहाल, जेई ने अपना जवाब पंचायती राज के कार्यकारी अभियंता को भेज दिया है।

फर्जी एस्टीमेट का मामला सांसद दुष्यंत चौटाला की एक चिट्ठी के बाद प्रकाश में आया है। दुष्यंत ने वाल्मीकि बस्ती के लोगों के अनुरोध पर कुएं की चारदीवारी के लिए अपने सांसद निधि कोष से रुपये देने का ऐलान किया था। सांसद ने एस्टीमेट बनवाने के लिए अतिरिक्त उपायुक्त को चिट्ठी भेजी थी, जो पंचायत विभाग से होते हुए जेई ओमप्रकाश के पास पहुंच गई। करीब एक महीने पहले तक ओमप्रकाश बरवाला के खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी कार्यालय में तैनात थे, मगर अब उनका टोहाना तबादला हो चुका है।

जेई ने कुएं की चारदीवारी का 7 लाख 63 हजार 500 रुपये का एस्टीमेट बनाकर भेज दिया। सांसद दुष्यंत ने जब एस्टीमेट देखा तो वह हैरान रह गए। सांसद का कहना है कि यह काम 2 लाख रुपये का भी नहीं है, फिर करीब चार गुणा एस्टीमेट कैसे बन गया।

कुएं के साथ तालाब कराया शामिल

सरपंच प्रतिनिधि बोला : मैंने तो भले की सोची थी

सरपंचप्रतिनिधि सतबीर सिंह का कहना है कि कुएं और तालाब की सुरक्षा के लिए जेई से दोनों का एस्टीमेट बनाने को कहा था। अगर तालाब की चारदीवारी नहीं बनेगी तो उसका पानी कुएं की चारदीवारी में लगेगा। उससे कुएं को नुकसान होता। बेशक कुएं और तालाब का एस्टीमेट बनाकर भेजा गया हो, पास तो सिर्फ कुएं का होना था।

जेई बोला, मेरे समझने में गलती हुई

जेईओमप्रकाश अब दो बाते कर रहे हैं। वह कहते हैं कि कुएं के साथ ही तालाब है। सरपंच प्रतिनिधि ने कुएं और तालाब दोनों की चारदीवारी का एस्टीमेट बनाने को कहा तो उन्होंने ऐसा कर दिया। साथ ही वह कहते हैं कि तकनीकी खामी के कारण एस्टीमेट में गड़बड़ी हुई, क्योंकि उन्हें समझने में गलती हो गई थी। वह स्वीकारते हैं कि कुएं की चारदीवारी में पौने आठ लाख रुपये का खर्च नहीं सकता। उसकी चारदीवारी तो सिर्फ डेढ़ लाख रुपये में बन जाती। एस्टीमेट में बाकी राशि तालाब की चारदीवारी की जोड़ी गई थी।