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केवल केजरी ने ही लगाया मोदी लहर पर ब्रेक

6 वर्ष पहले
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दिल्लीके मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद देशभर में चुनावों के नतीजे लगातार बीजेपी के पक्ष में आने पर लगा कि अरविंद केजरीवाल दोबारा दिल्ली में सरकार नहीं बना सकेंगे, लेकिन जनता के बीच मेहनत और संघर्ष ने उन्हें मजबूत बहुमत दिलाया। यह कहना है कि आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के सहपाठी उद्योगपति राजेश केडिया का। राजेश केडिया ने कक्षा 6 से 9 तक केजरीवाल के साथ पढ़ाई की। दोनों सिवानी से एक ही स्कूल वैन में सवार होकर बीआरजेडी पब्लिक स्कूल में पढ़ाई के लिए जाते थे। करीब 600 परिवारों को अपनी फैक्ट्री में काम देने वाले केडिया ने दिल्ली चुनाव के नतीजे आप के पक्ष में आने पर मिठाई बांटी। राजेश दिल्ली चुनाव की वोटिंग से करीब 10 दिन पहले अरविंद से मिले थे। केडिया ने अरविंद केजरीवाल के साथ बिताए अपने तीन साल का अनुभव साझा किया।

पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहे केजरी

खेलोंया डांस संबंधी गतिविधियों से केजरीवाल ने स्कूल समय में भले ही दूरी बनाए रखी हो, लेकिन वे एकेडमिक क्षेत्र में कभी पीछे नहीं रहे। उनके दोस्त केडिया ने बताया कि केजरीवाल क्लास में हमेशा अव्वल रहे। सभी टीचर केजरीवाल के लगन और मेहनत को हमेशा एक मिसाल के तौर पर विद्यार्थियों के सामने रखते थे। क्लास में कभी केजरी तो कभी मैं अव्वल रहता था। तीसरा कभी हमारी प्रतिस्पर्धा के बीच नहीं सका।

सामाजिक इश्यू में बचपन से रुचि

उद्योगपतिराजेश केडिया ने बताया कि अरविंद केजरीवाल का सामाजिक इश्यू की ओर बचपन से ही झुकाव रहा है। स्कूल में विभिन्न कार्यक्रमों में केजरीवाल केवल सामाजिक इश्यू पर होने वाले वाद-विवाद और स्टेज कार्यक्रमों में ही हिस्सा लेते थे। जब स्कूल के बाहर किसी सामाजिक बुराई से जुड़े मुद्दों पर बातचीत होती थी तो तभी वे कुछ बोलते नजर आते थे नहीं तो एक गंभीर छात्र की तरह रहते थे। स्कूल वैन में घर जाते समय भी हंसी मजाक नहीं करते थे।

खेलके मैदान को भी नकारा

हरियाणाकी धरती पर खेल जगत से जुड़ी कई बड़ी हस्तियां हैं। उनको देखकर आने वाली पीढ़ियां भी खेलों के प्रति आकर्षित हो रही है। मगर अरविंद केजरीवाल ने अपने पढ़ाई के दिनों में खेल मैदान से हमेशा दूरी बनाई रखी। कई बार जब उन्हें मैदान लाया भी गया तो उन्होंने कोई खास रुचि नहीं दिखाई। उनके सहपाठी केडिया ने बताया कि केजरीवाल ने तीन सालों में स्कूल गेम्स में एक या दो बार ही हिस्सा लिया।

केजरीवाल के कक्षा 6 से 9 तक की पढ़ाई की बात करे तो उनका मुकाबला किसी और से नहीं बल्कि अपने दोस्त राजेश केडिया से ही रहता था। कई बार वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में दोनों आमने सामने भी आए। उन दिनों को याद करते हुए केडिया ने बताया कि कई मुद्दों पर स्कूल में मेरे और केजरीवाल के समूह के बीच जबरदस्त बहस हो जाती थी। बाद में दोनों स्कूल वैन में अापस में चर्चा करते थे।

तब मैं हैरान रह गया : राजेश

वर्ष1981 से 1983 तक साथ पढ़ाई करने के बाद राजेश और अरविंद केजरीवाल के स्कूल और शहर अलग-अलग हो गए। अरविंद केजरीवाल के पिता हिसार शिफ्ट हो गए। इसके बाद कई वर्षों तक दोनों में बातचीत नहीं हुई। राजेश केडिया ने बताया कि जब अन्ना हजारे आंदाेलन में मैंने केजरीवाल को देखा तो उनसे मिलने के लिए दिल्ली पहुंच गया। राजेश ने बताया कि मैं हैरान रह गया तब स्टेज पर पहुंचते ही लंबे अर्से तक नहीं मिलने के बावजूद केजरीवाल ने मुझे एकदम पहचान लिया।

राजेश केड़िया।

राजेश केडिया की नजर में केजरीवाल की सफलता का राज

{जमीनसे जुड़ाव और लगातार लोगों के बीच रहकर काम करना।

{दिल्ली में भ्रष्टाचार मुक्त सरकार बनाने का संकल्प।

{कांग्रेस का दिल्ली और देश में जनाधार खो देना।

{बीजेपी का लोकल नेताओं को दरकिनार कर पैराशूट कैंडीडेट को उतारना।

{बीजेपी वर्कर का आमजन तक नहीं पहुंचना।