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सिटी बसों के बंद होने पर राजनीति गरमाई

7 वर्ष पहले
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शहरमें सिटी बसों के बंद होने पर राजनीति गरमा गई है। जनता की नाराजगी बढ़ रही है, विरोधी दलों ने मामले की जांच कराने की मांग उठाई है। जबकि, जनता को सहूलियत दिलाने के लिए सिटी बसों को तत्काल संचालित कराने की मांग की है। जनता की मांग को देखते हुए शहर विधायक डाॅ. कमल गुप्ता ने पैरवी करने का आश्वासन दिया है। जबकि, सांसद दुष्यंत चौटाला ने शहर सिटी बसों को शहर की लाइफ लाइन बताते हुए इन्हें चलाने के लिए परिवहन मंत्री से वार्ता करने का भरोसा दिलाया है। शहर में सिटी बसें चलने के कारण ऑटो चालक मनमानी करने लगे हैं। शहर में सिर्फ दो ही सिटी बसों को चलाया जा रहा है। लोगों की मानें तो सिटी बसें मिलने से वे मजबूरी में ऑटो का सहारा ले रहे हैं।

बस अड्डे के निकट ऑटो चालक लाइन में खड़े रहते हैं, इस बीच पैदल निकलने वालों के लिए रास्ता भी नहीं बचता।

ऑटो चालक ऐसे सवारियां फुल भरकर सड़कों पर दौड़ते हैं। सवारियों से भरे इन ऑटो को तो ट्रैफिक पुलिस रोकती है और नहीं प्रशासन को दिखता है।

परिजात चौक के दुकानदार चानु शर्मा ने बताया कि सिटी बस जिंदल चौक की तरफ चलने से ऑटो मे दस रुपये देकर जाना पड़ता है। उन्होंने कह कि शहर में अधिक संख्या में सिटी बसें चलनी चाहिए। उन्होंने कहा सिटी बसें में कम रुपये लगते हैं।

जीजेयू में पढ़ने वाले कुलदीप ने बताया कि मील गेट क्षेत्र में जाने के लिए सभी सिटी बसें चलानी चाहिए। जीजेयू में बहुत से मील गेट क्षेत्र से विद्यार्थी पढ़ने आते हैं। ऑटो सवारियों से भरे बिना नहीं चलते हैं। ऐसे में सिटी बसें चले तो इससे विद्यार्थियों को फायदा पहुंचेगा।

2वीं में पढ़ने वाले मंदीप ने बताया कि वह गंगवा से शहर में पढ़ने आता है। उसने कहा कि शहर आने के लिए ऑटो में एक तरफ के दस रुपये लग जाते हैं। जबकि, सिटी बस में पांच रुपये ही लगते हैं। अगर सिटी बसों को फिर से पहली तरह चला दिया जाए तो खर्च कम होंगे।

बस स्टैंड से सेक्टर-15 जा रहे सूरत सिंह ने बताया कि सिटी बसें शहर में अधिक संख्या में चलनी चाहिए। शहर में सिटी बसें केवल दो होेने के कारण ऑटो का सहारा लेना पड़ता है। बसें की कमी के कारण लोगों को परेशानी होती है।