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बस में यात्री को पड़ा दिल का दौरा, बड़े दिलवाले ड्राइवर-कंडक्टर और सहयात्रियों ने बचाई जान
भास्कर न्यूज | हिसार /हांसी
यात्रियोंसे भरी रोडवेज बस पर बैठे एक यात्री ने अपने बगल बैठे यात्री को बताया कि उसके सीने में बहुत तेज दर्द हो रहा है। सहयात्री ने तुरंत कंडक्टर और ड्राइवर को चिल्लाकर बताया। शुक्र था बस हांसी से बस स्टैंड से निकली ही थी। बस रुकी। ड्राइवर और कंडक्टर ऑटो से यात्री को नजदीक के एक निजी अस्पताल में ले गए। समय पर इलाज मिल गया और यात्री की जान बच गई। इस दौरान घंटे भर बस वहीं खड़ी रही। किसी यात्री ने कोई शिकायत नहीं की। सबका कहना था कि जब तक उसके परिवार वाले नहीं जाते हम लोग यहीं रुकेंगे। और जब लोग सच्चे दिल से दुआ कर रहे हों तो किसी का दिल कैसे डूब सकता है। यात्री की हालत सुधरने लगी। उसके परिवार वाले हिसार से हांसी पहुंच गए। तब जाकर बस रवाना हुई, यह संदेश देती हुई कि इंसानियत पहले बाकी सब बाद में।
हुआ यह कि हिसार से गुडग़ांव जा रही रोडवेज बस हांसी बस स्टैंड से जब चली तो उसमें सवार हिसार के एक यात्री लितेश ने साथ बैठे यात्री से सीने में दर्द होने की बात कही। इस पर यात्रियों ने तत्काल बस चालक शैलेंद्र और परिचालक नरेश को बताया। चालक ने बस काली देवी चौक पर रोक दी और चौक पर खड़ी पुलिस की एक पीसीआर के कर्मचारियों को इस बारे में बताया। पीसीआर में तैनात कर्मचारियों ने यात्री को अस्पताल पहुंचाने में असमर्थता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनके कोई बड़े अधिकारी यहां आने वाले हैं, वह यहां से नहीं हटेंगे।
पुलिस कर्मियों से जवाब मिलने के बाद बस चालक और परिचालक ने एक ऑटो रिक्शा को रुकवाया और यात्री को पास ही सैनी अस्पताल में ले गए। अस्पताल में डा. रणजीत सैनी ने यात्री का चेकअप किया और बताया कि उसे दौरा पड़ा है। यात्री को उपचार के लिए अस्पताल में रखा गया और मामले की जानकारी उसी के फोन से उसके परिजनों को दी गई। इलाज से उसकी हालत सुधरने लगी। परिजनों के हिसार से हांसी पहुंच जाने के बाद चालक और परिचालक लौटे और बस रवाना हुई। हालांकि इस दौरान अन्य यात्रियों को घंटे भर बस में ही बैठकर इंतजार करना पड़ा। लेकिन किसी ने देर होने की बात नहीं की और हंगामा किया। सब उसके ठीक हो जाने की दुआ कर रहे थे। डा. सैनी ने बताया कि यात्री को दौरा पड़ा था। करीब एक घंटे बाद उसकी हालत में सुधार हुआ। तब तक परिजन हांसी पहुंच गए थे और उसे अपने साथ हिसार ले गए।
इंसानियत