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प्रेम से परिवारजनों में हो जाते हैं प्रभु के दर्शन : डॉ. भीकम चंद

7 वर्ष पहले
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सनातनधर्म मंदिर में चल रही जीवन उपयोगी प्रवचन शृंखला के दूसरे दिन गुरुवार को भारत के प्रखर सामाजिक आध्यात्मिक, चिंतक विचारक एवं उत्कृष्ट साधक भीकम चंद प्रजापति ने बताया कि आप अपने पति प|ी, संतान, माता-पिता आदि निकट परिवारजनों को प्रभु के स्वरूप मानकर उनकी सेवा करेंगे। उनको प्रेम देंगे और अपने परिवारजन को बारी-बारी से इस प्रकार से प्रणाम करें- हे भगवान आप ही मेरी प|ी बनकर पधारे है, आपके इस रूप को मेरा प्रणाम। प्रणाम करने से आपका मोह मिट जाएगा। उसके अवगुण मिट जाएंगे, उसमें सद्गुण जाएंगे। प्रेम देने का दूसरा पाठ है किसी को भी दुख देना, उसका अपमान नहीं करना। प्रतीक्षा कीजिए इस क्षण के बाद मैं किसी भी परिवार जन को तन, मन, वचन और व्यवहार से दुख नहीं पहुंचाऊंगा इसका अपमान नहीं करूंगा। दुख देने से आप इतने महान बन जाएंगे कि आपका मुंह देखने वाले के पाप खत्म हो जाएंगे। उनकी वाणी है, तनकर मनकर वचन कर देत काहु दुख। तुलसी पालक झड़त है देखत उसका मुख।

सनातन धर्म मंदिर में पूजा करते डॉ. भीकम चंद प्रजापति अन्य।