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चौटाला परिवार ने तोड़ी 62 साल की परंपरा

7 वर्ष पहले
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अजय की प|ी नयना चार पीढ़ियों में चुनाव लड़ने वाली पहली महिला

महिलाओं पर मेहरबान दल

दो लाल परिवार से पहले ही महिलाएं

प्रदेशकी सियासत के पर्याय रहे तीन लालों में से बंसीलाल (किरण-श्रुति)व भजनलाल (जस्मा-रेनुका) के परिवार की महिलाएं पहले से ही राजनीति में सक्रिय हैं।

चौटाला गांव से भी पहली महिला

अभीतक कोई ऐसा विधानसभा चुनाव नहीं रहा जब चौटाला गांव से कोई प्रत्याशी मैदान में उतरा हो। दिलचस्प है कि गांव से किसी महिला ने कभी पंचायत का भी चुनाव नहीं लड़ा।

इधर, चर्चा है कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा की प|ी आशा हुड्‌डा भी गोहाना से चुनाव लड़ सकती हैं। हुड्‌डा परिवार तीन पीढ़ियों से राजनीति में हंै, लेकिन इस परिवार की कोई महिला चुनाव मैदान में नहीं उतरी। हालांकि लोकसभा चुनाव में आशा हुड्‌डा ने अपने बेटे दीपेंद्र के लिए रोहतक में प्रचार किया था। दीपेंद्र की प|ी हिमश्वेता भी एक-दो बार प्रचार में नजर आईं। मुख्यमंत्री पहले आशा के मैदान में उतरने की संभावना को नकारते रहे हैं।

कांग्रेस छोड़ भाजपा में गए पूर्व राज्यसभा सदस्य बीरेंद्र सिंह की प|ी प्रेमलता भी पहली बार चुनाव के मैदान में उतरी हैं। कर्नल की बेटी प्रेमलता वैसे तो सालों से ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की सदस्य थीं लेकिन कभी चुनाव नहीं लड़ा। अलबत्ता पति के प्रचार की कमान कई बार थामी। बीरेंद्र उचाना हलके से 7 बार चुनाव लड़े और सिर्फ दो बार हार का सामना करना पड़ा।

बीरेंद्र सिंह की प|ी प्रेमलता भी पहली बार मैदान में

मिसेज हुड्‌डा का भी नाम

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साल की नयना आदमपुर के गांव दड़ौली में जन्मी। हिसार में पढ़ी। फर्राटा धावक, हेड गर्ल, एनसीसी की बेस्ट कैडेट रहीं।