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किसान बोले, नहरी पानी दो, वरना त्याग देंगे प्राण

7 वर्ष पहले
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प्रशासनकी बेरुखी के कारण आखिरकार लघु सचिवालय परिसर में चल रहा बुड़ाक के किसानों का क्रमिक अनशन गुरुवार को आमरण अनशन में बदल गया। किसानों ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि भूख-प्यास से मर जाएंगे, लेकिन नहरों में पानी हर हाल में लेकर रहेंगे। आंदोलन में किसान नेताओं काे जोड़ने के लिए जनसंपर्क अभियान चलाने का निर्णय भी लिया गया।

साझा जल संघर्ष समिति के बैनर तले चल रहे धरने में वक्ताओं ने कहा कि नहरों में दो सप्ताह पानी की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन और सरकार उनके सब्र की परीक्षा ले रहा है। इसलिए किसानों की सुनवाई नहीं हो रही। क्रमिक अनशन पर बैठे पांच किसान मांगेराम राजलीवाल, बनवारी, दिलीप, मांगेराम गिल और जगीर ने शुक्रवार से आमरण अनशन शुरू कर दिया।किसानों ने एकजुट हाेकर चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होगी, तब तक वह आमरण अनशन पर रहेंगे। किसानों को आश्वासन नहीं, समस्या का समाधान चाहिए। किसानों की एकजुटता को बढ़ाने के लिए निर्णय लिया गया कि गांव-गांव में जाकर किसान नेताओं से संपर्क किया जाएगा।

लघु सचिवालय परिसर में आमरण अनशन पर बैठे किसान। इस मौके पर वीरेंद्र पुनिया, विक्रम श्योराण, राजेश, हवा सिंह, महेंद्र, जिले सिंह, दीवान सिंह, रामसिंह, रतन, राजवीर, फूल सिंह और प्रहलाद आदि शामिल थे।