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बंदरों के हमले में शिक्षिका की टांगें टूटीं
शहरमें लावारिस सांडों के बाद शहर में अब बंदरों का आतंक बढ़ गया है। दो दिन पूर्व उदयपुरिया मोहल्ले में प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने वाली शिक्षिका इंदिरा को बंदरों ने दौड़ा लिया। सीढिय़ों से गिरने की वजह से उसके दाेनों पैर टूट गए। मंगलवार को महिला के दोनों पैरों का ऑपरेशन हुआ। परिजनों का कहना है कि छह माह तक महिला दोनों पैरों से नहीं चल सकेगी। इसलिए परिजनों ने गुरुवार को मेयर शकुंतला राजलीवाला से आर्थिक मदद की गुहार लगाने के लिए मुलाकात करने का फैसला लिया है। सिंचाई विभाग से रिटायर हो चुके इंदिरा के ससुर राजकुमार ने सोमवार शाम सात बजे घटना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एक निजी काेरियर कंपनी में काम करने वाले ललित कुमार की प|ी इंदिरा अपने घर की छत पर बच्चों का होमवर्क करा रही थी। इसी बीच एक दर्जन बंदरों का झुंड छत पर गया। डर के कारण इंदिरा की बेटी जेस्मिन सहित अन्य बच्चे छत से भागने लगे तो बंदरों ने उन्हें दौड़ा लिया। बच्चों को बचाने के लिए शिक्षिका ने बंदरों को भगाने दौड़ पड़ी। मौका पाकर बच्चे तो नीचे उतर गए लेकिन शिक्षिका ऊपर ही रह गई। जब शिक्षिका ने नीचे उतरने के लिए दौड़ा तो बंदरों ने हमला बोल दिया। इससे सीढिय़ों से गिरते हुए नीचे आंगन में गिरी।
मेयर से मिलेंगे मोहल्ले के निवासी
^हम पूरी कोशिश करेंगे के शहर से लावारिस पशुओं के अलावा बंदरों को पकड़वाया जाए। इसलिए हम अलग से भी प्रयास करेंगे।\\\'\\\' शकुंतलाराजलीवाला, मेयर,नगर निगम।
^घटना दुखद है। मेरी कोशिश होगी कि लावारिस पशुओं के अलावा बंदरों को पकड़ने के लिए बड़ा अभियान चलवाया जाएगा। जिससे ऐसी घटना की पुनरावृत्ति हो सके।\\\'\\\' डॉ.एमएल कौशिक, जिलाउपायुक्त
बंदरों के हमले में घायल होने और दोनों पैर टूटने से प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने वाली इंदिरा के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। क्योंकि उनके पति और खुद वह छोटी सी पगार पर नौकरी कर घर का गुजारा करते हैं। ससुर राजकुमार का भी रो रो के बुरा हाल है। करीब आधा दर्जन घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी घटना दोबारा से हो, इसलिए मोहल्ले के लोगों के साथ मेयर से मिलने जाएंगे इस तरह से तो शहर में रहना ही मुश्किल हो जाएगा। इस पर ध्यान देने की जरूरत है।
बस अड्डे के निकट सेवक सभा अस्पताल में भर्ती इंदिरा और साथ में परिजन