पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • चेलों ने पुलिस से नहीं करने दी थी बात : रामपाल

चेलों ने पुलिस से नहीं करने दी थी बात : रामपाल

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
सतलोकआश्रम के प्रमुख रामपाल और पुलिस बल के बीच हिंसक झड़प से पहले मामले को शांतिपूर्वक सुलझाने के लिए सतलोक आश्रम पहुंचे नेताओं और प्रशासनिक अफसरों की एक बार भी रामपाल से बातचीत नहीं हुई थी। नेता और अफसर रामपाल के सहयोगियों से ही बातचीत करके आश्रम से बाहर गए थे। रामपाल के सहयोगियों ने उन्हें रामपाल तक पहुंचने ही नहीं दिया था। यह खुलासा रामपाल ने एसपी सतेंद्र कुमार गुप्ता और आईजी अनिल कुमार राव के सामने पूछताछ में किया है। रामपाल ने बताया कि उनकी किसी भी नेता या अधिकारी से कोई बातचीत नहीं हुई थी। रामपाल ने आरोप लगाया कि उनके सहयोगियों ने उन्हें नहीं मिलने दिया। ये सारी बातें रामपाल की डिस्क्लोजर रिपोर्ट में शामिल हैं।

रिपोर्ट में रामपाल ने अपने खराब स्वास्थ का हवाला दिया है। रामपाल ने बताया कि 8 से 18 नवंबर तक उसकी तबीयत खराब थी। इस संबंध में मेरे निजी चिकित्सकों की ओर से पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में मेडिकल रिपोर्ट भी दाखिल की गई थी। रामपाल का कहना है कि इस दौरान कई मुख्य अनुयायियों ने भी उनसे मिलने की कोशिश की, लेकिन वे मुलाकात नहीं कर सके।

टकराव की स्थिति टालने के लिए सतलोक आश्रम में बरवाला से भाजपा के प्रत्याशी रहे सुरेंद्र पूनिया सबसे पहले पहुंचे। वह कमेटी प्रवक्ता राजकपूर को प्रशासनिक अधिकारियों से मिलने ले गए थे, लेकिन नतीजा सिफर रहा। इसके बाद महम-चौबीसी के नेता शमशेर खरखड़ा ने आश्रम की कमेटी के सदस्यों से लंबी बातचीत की। यहां भी कोई समाधान नहीं निकला। बाद में भाजपा नेता बलराज कुंडू ने भी बातचीत की थी। सुरेंद्र पूनिया तो लगातार आश्रम में बातचीत के आते रहे। इसी तरह पूर्व केंद्रीय मंत्री जयप्रकाश ने भी सुलह का प्रयास किया था।

रामपाल ने पुलिस को बताया कि जब आश्रम में नेता और अधिकारी आए थे तो उसने इनसे मिलने का प्रयास किया, पर उसके सहयोगियों ने उसे कमरे से बाहर नहीं आने दिया। रामपाल ने आरोप लगाया कि उसे प्रवक्ता राजकपूर, राजेंद्र, राजेंद्र बरोदा, मनोज पुरखास, वजीर कंडेला और रमेश कंडेला ने बंधक बना लिया था। इन सभी ने खुद नेताओं और अधिकारियों से बातचीत की। इनके बीच क्या बात हुई मुझे मालूम नहीं।

पूछताछ

प्रकरण