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आधे घंटे का ट्रैफिक जाम कर रहा व्यक्ति के सात दिन खत्म
जिंदलचौक हो या फिर डाबड़ा चौक। राजगुरु मार्केट से लेकर बस अड्डा, नागोरी गेट, कैंप चौक ट्रैफिक जाम में सब जगह वाहन रेंगते हैं। जिम्मेदार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की आंखें खोलने के लिए भास्कर ने एक्सपर्ट्स की मदद से रविवार से मंगलवार तक एक सर्वे कराया। इसमें डाबड़ा चौक से रोजाना गुजरने वाले वाहनों की तादाद के आधार पर प्रतिदिन जाम में फंसने वाले लोगों, चार और दुपहिया वाहनों का आंकड़ा निकाला। इसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। करोड़ों रुपये का श्रम लोगों का जाम में व्यर्थ हो रहा है। जाम के कारण सालाना एक व्यक्ति के बेशकीमती जिंदगी के सात दिन खत्म हो रहे हैं।
भास्करने ऐसे किया सर्वे
भास्करने डाबड़ा चौक पर आधा घंटे में निकलने वाले दुपहिया और चार पहिया वाहनों के निकलने की तादाद को गिना। वैसे तो पीक टाइम पर प्रति मिनट छोटे-बड़े 140 तक वाहन निकले। हालांकि 24 घंटे के औसत काे हमने प्रति मिनट 30 वाहन डाबड़ा चौक से निकलना तय किया। इस हिसाब से एक घंटे में 1800 वाहन औसतन यहां से गुजरे। 12 घंटे में डाबड़ा चौक से करीब 21,600 वाहन गुजरने का औसत निकाला। इसमें रोजाना दो पहिया वाहनों के गुजरने की तादाद 14000 आंकी गई, चार पहिया वाहनों का यही आंकड़ा 12 घंटे में करीब 7500 तय किया। स्कूली बसों से लेकर बाइक, कार आदि वाहनों में बैठकर निकलने वाले व्यक्तियों का औसत तीन से लेकर चार व्यक्ति तय किया। इस लिहाज से रोजाना 70 हजार व्यक्ति जाम में फंसने का औसत निकाला।
राेजाना का जाम पड़ रहा जेब पर भारी
7500 डीजल वाले चार पहिया वाहनों का औसतन 54 रुपये आधा घंटे में अतिरिक्त डीजल बर्बाद होता है तब इन सभी चार पहिया वाहनों का 40,5000 रुपये रोजाना खराब हो जाते हैं।
> बाइक सवारों को यदि हम रोजाना 30 मिनट जाम में फंसने का औसत तय करते हैं तो 14000 बाइकों का प्रति आधा घंटे में करीब 20 रुपये का पेट्रोल हवा में ही उड़ जाता है। इसहिसाब से इन बाइकों से करीब 2.80लाख रुपयेका पेट्रोल बर्बाद होता है। यानिलोगों के मेहनत के करीब 6,85000 रुपये रोजाना पेट्रोल-डीजल के दाम हवा में उड़ जाते हैं।
शहर के बीचो-बीच मुख्य सड़क पर अक्सर जाम जैसे हालात रहते हैँ।
यदि एक व्यक्ति माह में 15 घंटे जाम में गंवा देता है। माह में घंटों के हिसाब से दो दिन की मजदूरी वह जाम में बिता देता है। दो दिन की दिहाड़ी यदि 1000 रुपये मा