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जनसंख्या तीन गुणा बढ़ी पर बसों की संख्या नहीं : नैन
वर्ष1989-90 में हिसार डिपो में बसों का बेड़ा 210 आवंटित किया गया था। उस समय पूरे प्रदेश में राज्य परिवहन की 3900 बसें बेड़े में शामिल थी। वर्ष 1991, 2001, 2011 में तीन बार जनसंख्या गणना हो चुकी है, जिनसे वर्तमान जनसंख्या के आधार पर परिवहन बेड़े में बसों की संख्या में वृद्धि नहीं की गई। पूर्व सरकार भी निजी परिवहन हितों की पोषक बनी रही, जिसके कारण अवैध निजी बस परमिटों में वृद्धि होती रही। वहीं रोडवेज का बसों का बेड़ा 3900 से घटकर 3400 तक सिमट गया। कांग्रेस शासन में 1993 में तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा लगभग 900 निजी बस परमिट जारी किए गए। यही नीति जारी रखते हुए कांग्रेस के ही मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पहले के पांच वर्ष के शासनकाल में 2699 निजी बस परमिट जारी करने की कोशिश की, जिसके विरोध में रोडवेज कर्मचारी यूनियनों द्वारा हड़ताल की गई तथा मामला उच्च न्यायालय में पहुंचा। उच्च न्यायालय ने निजी बस परमिट नीति को जनविरोधी बताते हुए उस पर स्टे लगा दिया।