अपहर्ताओं को गच्चा दे आया बच्चा
भिवानीसे अगवा 13 साल का एक मासूम शातिर अपहर्ताओं को चकमा देकर खुद पुलिस के पास पहुंच गया। उसे अगवा करने वाले एक गाड़ी में डालकर हिसार बस अड्डे के पास पहुंचे थे। यहां वह किसी तरह उनसे बचकर बदहवास एग्जीक्यूटिव इंजीनियर हाउस की तरफ दौड़ा। यहां एक राहगीर का हाथ पकड़ा कर उससे पूछा- प्लीज, मुझे पुलिस अंकल का पता बता दो। उस राहगीर ने पुलिस को मामले की सूचना दी तो बच्चे ने थाने में खुद के अगवा होने की वारदात का खुलासा किया।
वैन में सवार चार किडनैपर 13 साल के दीपांशु को हिसार लाए थे। हिसार बस स्टैंड पर वैन रोककर आरोपी शराब खरीदने लगे तो दीपांशु ने चालाकी से वैन से उतर कर दौड़ता हुआ सिटी थाने के पीछे स्थित एग्जीक्यूटिव इंजीनियर हाउस जा पहुंचा। बाद में थाने पहुंचकर दीपांशु ने सारी आपबीती पुलिस को बताई। पुलिस ने दीपांशु के माता पिता से संपर्क किया। बाद में उसके पिता शशिभूषण शर्मा भिवानी से हिसार पहुंचे और दीपांशु को घर लेकर चले गए। शाबाश दीपांशु। भिवानी के रहने वाले इस 13 वर्षीय बच्चे ने जिस बहादुरी का परिचय दिया वह काबिले तारीफ है।
अंशुल ने दिखाई थी बहादुरी
इस तरह छूटा
अपने कलेजे के टुकड़े के आंसू छलके तो रो पड़े शशिभूषण
एेसी ही बहादुरी का परिचय पीएलए निवासी 11 साल के अंशुल गिल ने दिया था। अंशुल पुलिस विभाग में तैनात हेड कांस्टेबल का बेटा है। मई में चार बदमाशों ने अपहरण कर लिया था। आरोपी उसे सिरसा लेकर चले गए थे। इसके बाद अंशुल अपहरणकर्ताओं को गच्चा देकर उनसे बचकर सिरसा से हिसार घर पहुंचा था। अंशुल ने चारों को सिरसा में एक कमरे में बंद कर रखा था।
अपहरण करने वाले बस अड्डे के पास गाड़ी रोकर शराब लेने के लिए चले गए। इस दौरान वे गाड़ी की सीट पर पर्स छोड़ गए। दीपांशु ने साहस का परिचय देते हुए सीट पर रखा पर्स उठाया और झट से गाड़ी की खिड़की खोली और तलाकी गेट की तरफ दौड़ पड़ा। इस पर्स में 200 रुपये मिले।
जब दीपांशु के पिता शशि भूषण पुलिस स्टेशन पहुंचे तो दीपांशु उन्हें देखकर गले लगने के लिए दौड़ पड़ा। कलेजे के टुकड़े की बहते आंसुओं को देख कर पिता भी आंसुओं को नहीं रोक पाए। परिजनों ने बताया कि दीपांशु को पेट में स्टोन की परेशानी थी। करीब 22 दिन पहले ऑपरेशन हुआ था। दीपांशु रोहतक स्थित जेडी रॉयल स्कूल में आठवीं में पढ़ता है। रोहतक में दीपांशु बुआ के घर रहता है।
फुटेज खं