एमए लोक प्रशासन वालों की फिर अनदेखी
एकही घर की दो संतान की तरह हैं- पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन पॉलिटिकल साइंस। विडंबना देखिए मान्यता मिलने के बावजूद राजनीतिक शास्त्र यानी पॉलिटिकल साइंस के लिए लेक्चरर की नियुक्ति में राज्य सरकार दोनों ही विषयों के बीच भेदभाव कर रही है। पिछले साल की तरह इस बार भी लेक्चरर पद के लिए विज्ञापन में लोक प्रशासन के बारे में जिक्र तक नहीं किया गया है। स्वाभाविक है कि लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर सैकड़ों विद्यार्थियों के भविष्य पर तलवार लटकती दिखाई दे रही है।
प्रदेश सरकार ने कुल 413 लेक्चरों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। हर विषय को नियमानुसार परिभाषित किया गया। इसमें पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन अर्थात लोक प्रशासन विषय का जिक्र राजनीतिक शास्त्र में नियुक्ति के संदर्भ में नहीं किया गया।
यहां ये बता दें कि पिछले साल भी प्रदेश सरकार की ओर से इसी विषय के प्रति यही उदासीनता दिखाई गई थी। अभ्यार्थियों की ओर से इसमें आपत्ति उठाए जाने के बाद शुद्धि पत्र के जरिए विज्ञापन में लोक प्रशासन जोड़ा गया। अहम सवाल यह उठता है कि क्या राज्य सरकार अब की बार प्रकाशित विज्ञापन में संशोधन करेंगी? एक ही घर की दो संतान के बीच यह सौतेला व्यवहार बार -बार क्याें होता है।
शिक्षकों की जुबानी
लोकप्रशासन से एमए कर चुकी हिसार की एक शिक्षिका ने बताया कि उसने लोक प्रशासन विषय में एस्टेट भी क्लियर कर लिया है। वह गेस्ट शिक्षिका हैं, ऐसे में लोक प्रशासन की पोस्ट निकलने के कारण उनके भविष्य पर बादल मंडराते नजर रहे हैं। वहीं लोक प्रशासन विषय में एमए कर चुके हिसार के प्रवीन कुमार ने बताया कि सरकार को चाहिए जब सरकार ने दोनों विषयों के टीचर किसी भी विषय के लिए अप्लाई कर सकते हैं तो लोक प्रशासन के विद्यार्थियों के साथ यह भेदभाव क्यों?
30 अगस्त काे छपा था विज्ञापन
हरियाणामें शिक्षक भर्ती के लिए अध्यापक भर्ती बोर्ड ने 30 अगस्त केवल पॉलिटिकल विषय की 413 पोस्ट निकाली थी। इन पोस्टों के आवेदन करने की अंतिम तिथि 26 सितंबर रखी गई है। लेकिन लोक प्रशासन विषय की अनदेखी की गई।