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गर्भस्थ शिशु के विकारों को रोकने की कोशिश
जिंदगीको खुशहाल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग अब नवजात बच्चों के स्वास्थ्य पर खास फोकस करेगा। इसके लिए विभाग ने कमर कस ली है। एएनएम और आशा वर्कर्स की टीम घर-घर जाकर अभिभावकों को जागरूक करेंगी, ताकि उनके घर तंदुरुस्त बच्चा पैदा हो। इसके लिए विभाग ने हाल ही में प्री कंसेप्शन केयर स्कीम शुरू की है, ताकि शिशु मातृ मृत्यु दर में गिरावट सके। साथ ही बच्चों को जन्म से पहले ही जन्मजात विकारों से बचाया जा सके। प्री कंसेप्शन केयर स्कीम के तहत बच्चे के जन्म से पहले ही नवदंपती को नवजात की सुरक्षा से संबंधित जानकारी दी जाएगी। स्वास्थ विभाग के अधिकारियों ने बताया कि स्कीम को सही तरीके से घर-घर पहुंचाने के लिए एएनएम और आशा वर्करों की सेवाएं ली जाएंगी। साथ ही स्वास्थ विभाग की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में नवदंपती को विशेष बधाई पत्र भेजे जाएंगे। इसी तरह परिवार नियोजन की योजनाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी। प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली समस्याओं के साथ जन्म से पहले बच्चे में होने वाले रोगों के बारे में दंपती को जानकारी दे जाती है। साथ ही रंगीन एक्स-रे के साथ कुछ अन्य टेस्ट भी किए जाते हैं।
इसलिए पड़ी जरूरत
अक्सरकुछ लापरवाही के कारण जन्म से पहले ही बच्चों में विकार/बीमारियां हो जाती हैं। इससे शिशु मातृ मृत्यु दर में इजाफा होने लगता है। इसे कम करने के लिए ही विभाग ने बच्चों को जन्मजात विकारों से बचाने के लिए नवदंपती को जानकारी देने की योजना बनाई। इसके लिए प्रेगनेंसी से एक महीने पहले ही नवविवाहिता को आयरन फॉलिक एसिड की टेबलेट भी दी जाएंगी। हरियाणा ऐसा पहला प्रदेश है, जिसने मातृ एवं शिशु को गर्भाधान पूर्व देखभाल सेवाएं देने के लिए केयर पैकेज लागू किया है।
प्रेगनेंसी से पहले और उसके बाद सावधानियां नहीं बरते जाने के कारण कई केस में बच्चों में जन्मजात विकार हो जाते हैं। इससे कुछ मामलों में कटे-फटे होंठ तालू, मस्तिष्क विकृति, मस्तिष्क हर्निया, बच्चों में होने वाले कैंसर, मंद बुद्धि, विकासात्मक विकलांगता, कम वजनी बच्चे बौनापन आदि की समस्या हो जाती है। ऐसे हालत में बच्चा सामान्य जिंदगी नहीं जी पाता और उम्रभर के लिए दूसरों पर निर्भर होकर रह जाता है और परेशानियां झेलता है। विभाग की योजना यदि सफल हुई तो इससे बच्चे इन विकारों से तो बचेंगे ही साथ ही शिशु-मातृ मृत्यु दर में भी कम होगी।
डिप्टी