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मातृभाषा एवं राष्ट्रभाषा वंदनीय होती है: गुप्त

7 वर्ष पहले
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गांधीअध्ययन केंद्र सर्वोदय भवन में राष्ट्रभाषा हिंदी की दशा और दिशा विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें बतौर मुख्य वक्ता विनोद शंकर गुप्त ने शिरकत की।

उन्होंने कहा कि 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाना मात्र औपचारिकता रहे, बल्कि इसमें प्राथमिक स्तर से विश्वविद्यालय स्तर तक पढ़ाई हों, पाठ्यक्रमों में सर्वमान्य भाषा हिंदी की अनिवार्यता हो। उन्होंने कहा कि अंग्रेज सालों पहले चले गए, किंतु अंग्रेजी अब भी कुर्सी पर विराजमान है। राष्ट्रभाषा भी मातृभाषा की तरह सरल व्यावहारिक वर्तनी हो, हिंदी में वे सभी गुण है, क्योंकि इसे देशवासी ही नहीं, विदेशी भी समझते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अंग्रेजी या उर्दू या हिंदी में प्रयोगकर्ता अशुद्धियों पर ध्यान नहीं देते।

सभी भाषाओं को सीखें, किंतु ज्ञान परीक्षा की भाषा न्यायालयों की भाषा एवं कार्यपालिका, संसद विधानसभाओं की कार्यगत भाषा एकमात्र हिंदी हो। हम देश को भारत माता कहते हैं। इसलिए माता के समान मातृभाषा भी वंदनीय है। सहभाषा उर्दू एवं क्षेत्रीय भाषाओं को भी आदर मिले। बोलियां, भाषाएं प्यार सौहार्द बढ़ाती है। इस अवसर पर सतीश कौशिक एवं जयभगवान लाडवाल ने कविता पाठ किया। संचालन सुशील बुडाकोटी शैलांचली ने किया। इस मौके पर भगवानदत शर्मा, वीरेंद्र कौशल, राजेंद्र जैन, विजय गुप्ता, डॉ महेंद्र सिंह धर्मवीर शर्मा सहित कई बुद्धिजीवी उपस्थित थे।

\\\"हिंदी से ही संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास संभव\\\'

हिसार |होली चाइल्ड सीनियर सेकंडरी स्कूल में हिन्दी विभाग की ओर से हिन्दी पखवाड़ा मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय में कविता भाषण, दोहे, गायन, नाटक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। प्रतियोगिता में पहले, दूसरे तीसरे स्थान पर रहने वाले विद्यार्थियों को स्कूल के प्रधानाचार्य ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। प्रधानाचार्य ने कहा कि हिंदी भाषा से ही हमारे संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास संभव है इसलिए बच्चे हिन्दी में बचपन से ही रुचि रखे। हिन्दी हमारी संस्कृति की पहचान है। मातृभाषा को बचाने का प्रयास तभी संभव हो पाएगा जब हिन्दी को आम बोल चाल की भाषा के साथ-साथ सरकारी कामों में भी प्रयोग किया जाए।

हिंदी की उपयोगिता महत्व की जानकारी दी

हिसार| राजकीयमहिला महाविद्यालय में हिंदी दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया