पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • वैराग्य पाने के लिए गुरु जरूरी

वैराग्य पाने के लिए गुरु जरूरी

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
आजादनगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन सोमवार को आचार्य मोहन शरण महाराज ने कहा कि व्यक्ति को हर परिस्थिति में एक रस बनकर रहना चाहिए। आचार्य ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने द्वारका में सोलह हजार एक सौ आठ विवाह किए। भगवान की प|ियां साक्षात वेद मंत्र हैं। उन्होंने कहा कि भगवान ने जरासंध को मार दिया एवं पांडवों से अश्वमेघ यज्ञ करवाया और शिशुपाल का उद्धार किया। भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को हर प्रकार से सहायता की। जो व्यक्ति अपने आप को भगवान के चरणों में अर्पण करता है भगवान उसका उद्धार करते है।

आचार्य ने इसके बाद सुदामा का वर्णन करते हुए कहा कि सुदामा जब चार मुट्ठी चावल लेकर द्वारका में भगवान से मिलने जाते है तो द्वारकाधीश ने सुदामा को सुदामा पुरी देकर धन्य कर दिया। जो भगवान के लिए मन में प्रेम रखता है और सच्चे मन से भगवान को कुछ देता है तो भगवान उसे उससे कई गुणा अधिक देते है। इसके बाद आचार्य ने वैराग्य के बारे में बताते हुए कहां कि वैराग्य तीन प्रकार का होते है। मर्कट, श्मशान सच्चा वैराग्य। वैराग्य पाने के लिए गुरु भी जरूरी है। गुरु चौबीस प्रकार के होते है, जिनसे हमें शिक्षा प्राप्त होती है। दीक्षा गुरु एक होना चाहिए जो भव सागर से पार करा देता है। आगे आचार्य ने बताया कि भगवान से मिलने का एक ही तरीका है संसार से वैराग्य और भगवान के प्रति अनुराग यहीं सच्चा तरीका है। जो भागवत कथा को सुनता है वह निश्चित ही परीक्षित की तरह मुक्ति पाता है। कथा के दौरान कृष्ण सुदामा की झांकी भी दिखाई गई।

मोहन शरण।

आजाद नगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करते श्रद्धालु।