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संवरेंगी स्लम बस्तियां

6 वर्ष पहले
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शहरके 39 स्लम एरिया पर नगर निगम प्रशासन का फोकस रहेगा। निगम ने सर्वे करके इन बस्तियों को चिह्नित किया है। इनमें से करीब 24 नॉटीफाइड स्लम बस्तियां भी शामिल हैं। जनवरी में हुए सर्वे की रिपोर्ट निगम अफसरों को मिल चुकी है। इन बस्तियों में तीन फेज में विकास कार्य होंगे।

सर्वे से जुड़े निगम के सूत्रों ने बताया कि मई, 2014 में केंद्र सरकार ने स्लम बस्तियों की पहचान के लिए 14.46 लाख रुपये का बजट भेजा था। इसलिए निगम ने निजी संस्थान से सर्वे कराया। जो सर्वे हुआ है, उसमें प्राथमिक तौर पर होने वाले काम सबसे पहले होंगे। इसमें पेयजल आपूर्ति, सड़क, बिजली, आवासीय योजना शामिल हैं। इसी हफ्ते प्रोजेक्ट पर चर्चा होगी।

3. न्यूआईडेंटिफाइड स्लम बस्ती : झोपड़ी,झुग्गियों में रहने वाले लोग जोकि शहरी क्षेत्र में अपना अड्डा जमा लेते हैं। वह एक स्थान पर टिकने के बजाय जिस स्थान पर चंद दिनों तक रहने लायक जगह मिल जाए, वहीं तंबू गाड़ दें, इन्हें न्यू आईडेंटिफाइड स्लम बस्तियों में शामिल किया है। शहर में ऐसी कई स्थान हैं।

2. नॉननॉटीफाइड स्लम बस्ती : ऐसीबस्तियां जोकि विकास कार्यों से महरूम हैं और यहां कभी भी किसी प्रोजेक्ट के तहत काम नहीं हुए हों, ऐसी बस्तियों को प्रशासन सर्वे करने नॉन नॉटीफाइड बस्ती में शुमार करता है। जैसे सर्वे में शामिल बजरंग नगर की कॉलोनी आदि में विकास कार्य होना बाकी है।

1. नॉटीफाइडस्लम बस्ती : प्रशासनऔर निगम को बस्तियों की जानकारी हो, इसके बावजूद विकास से दूर हों यह बस्तियां नॉटीफाइड स्लम बस्तियों में शामिल होती हैं। ऐसे स्थानों पर विकास कार्य जैसे सड़क, बिजली, पेयजल आपूर्ति आवास आदि छोटे-बड़े कामों की शुरुआत होती है। आजाद नगर, सातरोड आदि।

अफसर 15 को मीटिंग में मांगेंगे सुझाव

स्लमबस्तियों में क्या विकास कार्य होने चाहिए। इनमें अभी किन संसाधनों की कमी और भविष्य में यहां रोजगार, शिक्षा के बेहतर इंतजाम कैसे किए जा सकते हैं, इसके लिए नगर निगम और अफसर बस्तियों के लोगों के साथ 15 फरवरी को मीटिंग बुलाएंगे।