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अपने शहर के आम आदमी ने जीत लिया देश का दिल
बास के पवन शर्मा भी दिल्ली के विधायक
दिल्लीमें अरविंद केजरीवाल की फौज की फतह के साथ अपने शहरवासियों का सीना भी गर्व से चौड़ा हो गया। “आप” के संयोजक और अपने शहर के एक आम आदमी ने दिल्ली के साथ देश का दिल जीत लिया। इस बड़ी जीत पर सड़कों पर जश्न का माहौल दिखा। शहर में रह रहे उनके मामा राम बाबू अग्रवाल के घर पर भी बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। वहीं समर्थकों ने भी जश्न मनाया।
उधर, सिवानी की अनाज मंडी में आम आदमी भी आप की टोपी पहने दिखे। बाकी दिनों से ज्यादा चहलकदमी। एक छोटे से मकान के बाहर मीडिया के कर्मियों की भीड़। एक बुजुर्ग को देखते ही बाइट लेने की होड़। ये बुजुर्ग थे अरविंद केजरीवाल के चाचा गिरधारी लाल। वह अपने पूरे परिवार के साथ आप की टोपी लगाकर टीवी के सामने बैठे थे। मीडिया कर्मियों ने उन्हें अरविंद केजरीवाल के बारे में कुरेदा। गिरधारी लाल बताते हैं कि केजरीवाल ने कहा था कि पहले दिल्ली फतह करूंगा उसके बाद देश की बारी आएगी। यह दावा केजरीवाल ने करीब 7 महीने पहले सिवानी आने पर किया था। वह अपने चाचा मुरारीलाल के निधन पर शोक जताने आए थे। उन्होंने सिवानी मंडी में रह रहे चाचा गिरधारीलाल से चुनाव को लेकर चर्चा की थी। अब गिरधारीलाल ने कहा कि धुन के पक्के केजरीवाल ने जो कहा-आज वह करके दिखा दिया। पूरी दिल्ली उनके साथ अा गई। ऐसा ही माहौल 29 दिसंबर, 2013 को सिवानी मंडी का था। तब अरविंद पहली बार दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुए थे। लेकिन इस बार खुशी कई गुणा बढ़ी है।
गिरधारीलाल का कहना है कि जिस तरह से दिल्ली की जनता ने केजरीवाल के प्रति इतना मोह दिखाया है अब उन्हें अपने किए गए वादों को पूरा करके दिल्ली की जनता का कर्ज उतारना होगा। दिल्ली के अप्रत्याशित नतीजे हैं। लाल को 44 से 45 सीटों की उम्मीद थी।
दाल मिल मालिक थे दादा
1947से पहले अरविंद के दादा मंगलचंद केजरीवाल खेड़ा छोड़कर सिवानी मंडी में आकर बस गए थे। उन दिनों में सिवानी की दाल मशहूर होती थी। मंगलचंद ने दाल मिल लगाई थी। उनके पांच बेटे थे। अरविंद के पिता गोविंदराम सबसे बड़े हैं। फिर मुरारीलाल, राधेश्याम, गिरधारीलाल और श्यामलाल। गोविंदराम ने पहले हिसार में जिंदल ग्रुप में काम किया और फिर दूसरे शहरों में। अरविंद के चाचा राधेश्याम का सिक्किम में व्यापार है।
पहला नाम था किशन
यहबात बहुत कम लोग जानते हैं कि केजरीवाल का पहला नाम किशन था। परिवार के बड़े बुजुर्ग उन्हें इसी नाम से पुकारते थे। केजरीवाल 16 अगस्त, 1968 को पैदा हुए थे। उस दिन जन्माष्टमी थी। इसी वजह से उन्हें पारिवारिक सदस्य किशन कहने लगे।
आरटीआई बिल बेशक पिछली कांग्रेस सरकार ने लागू किया, मगर उसके लिए अलख जगाने का काम अरविंद और उनकी संस्था परिवर्तन ने किया। राइट टू इन्फॉरमेशन पर काम करने के लिए उन्हें एशिया का नोबेल पुरस्कार कहे जाने वाला मैग्सेसे अवार्ड मिला।
करीब दस साल पहले चले गए थे दिल्ली
पवनशर्मा करीब दस वर्ष पूर्व दिल्ली चले गए थे। वहां स्टील की फैक्ट्री लगा ली। कुछ समय बाद वह माता पिता को भी दिल्ली ले गए। अपने बास में लगातार आते रहते हंै। भाई सत्यवान, ईश्वर, रामू, रामबीर, जयबीर ने बताया की पिछले माह ही टिकट मिलने के बाद वह गांव में आए थे।
पवन शर्मा।
िसवानी मंडी में अपने घर में पूरे परिवार के साथ टीवी पर दिल्ली चुनाव के नतीजे देखते अरविंद के चाचा गिरधारी लाल।
चाचा गिरधारी लाल के साथ केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल 1984-85 में डीएन कॉलेज के छात्र रहे। प्री इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। 82.5 प्रतिशत अंकों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। यह जानकारी सुशील राजपाल ने दी।