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जबकेजरीवाल ने पार्टी बनाई तो उद्योग एवं व्यापार मंडल के प्रदेशाध्यक्ष बनाए गए। उनके चाचा के लड़के हरिओम ने बताया कि महेंद्र का जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा है। गांव सोंगरी-गुलियाणा के स्कूल में ही उन्होंने 10वीं की पढ़ाई की। मॉडल टाउन से एक बार पार्षद का चुनाव भी लड़ा, लेकिन चुनाव हार गए थे। महेंद्र ने कैथल की नई अनाज मंडी में ताऊ की आढ़त की दुकान पर कई वर्ष तक मुनीम की नौकरी भी की। वे अक्सर कैथल आते रहते हैं। चुनाव को लेकर कैथल से उनके परिवार के लोग एक माह से दिल्ली में जमे हुए हैं।
बहादुरगढ़क्षेत्र के तीन लोग पहुंचे दिल्ली विधानसभा : दिल्लीकी मुंडका, मंगोलपुरी और कैंट की सीटों पर झज्जर जिले के लोग आप के टिकट पर विधानसभा में पहुंचे हैं। मंगोलपुर से राखी बिडला, दिल्ली कैंट से सुरेंद्र सिंह जहां दोबारा जीते वहीं मुंडका से सुखबीर सिंह पहली बार एमएलए बने हैं। बहादुरगढ़ क्षेत्र के मातन गांव निवासी सुखवीर सिंह ऑल इंडिया रेडियो में डिप्टी डायरेक्टर थे। नौकरी से इस्तीफा देकर चुनाव मैदान में उतरे थे। सिंह फिलवक्त परिवार सहित दिल्ली में बादली के पास हिरण कूदना गांव में रह रहे है। मंगोलपुरी सुरक्षित सीट से जीतने वाली राखी बिडला मूलत: बहादुरगढ़ के छारा गांव की हैं। 2013 के चुनाव में वह यही से जीती थीं। दिल्ली कैंट सीट से पूर्व कमांडो सुरेंद्र फिर विधायक बने हैं। वह भी छारा गांव के रहने वाले हैं। उनका परिवार अभी भी इसी गांव में रहता है। भावना गौड़ भी पालम सीट से ‘आप’ विधायक बनी हैं। वह मूलत: रेवाड़ी की हैं।
सिवानीमंडी...
केजरीवालकी चाची पिस्ता देवी का कहना है कि अरविंद ने फिर से कमाल कर दिया। उधर, छोटी काशी कही जाने वाली भिवानी की माटी राजनीति के लिहाज से कुछ खास है। हरियाणा को सर्वाधिक तीन मुख्यमंत्री देने का गौरव भिवानी को है। अब उस जमीन का एक और लाल दिल्ली में सीएम की कुर्सी पर बैठेगा। वह 13 महीनों में ही दोबारा दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड भी बनाएंगे।
भिवानी जिले से चौधरी बंसीलाल, मास्टर हुकम सिंह और बनारसीदास गुप्ता मुख्यमंत्री बन चुके हैं। इन तीनों ने हरियाणा में 15 साल से अधिक बरसों तक राज किया। चौधरी बंसीलाल ने सर्वाधिक तीन बार प्रदेश की बागडोर संभाली। बनारसीदास गुप्ता को दो बार और मास्टर हुकम सिंह को एक बार मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला। भिवानी से निकल कर दिल्ली पर राज करने वाले केजरीवाल पहले शख्स हैं। वैसे केंद्र सरकार में रहते हुए भिवानी के नेता दिल्ली में काम कर चुके हैं।
केजरीवाल पर भिवानी और हिसार दोनों ही दावेदारी करते हैं। वजह उनका मूल गांव खेड़ा है। सिवानी से 3 किमी. दूर गांव खेड़ा कभी हिसार तो कभी भिवानी जिले का हिस्सा रहा है। 1996 में बंसीलाल की सरकार आने के बाद सिवानी को हिसार से अलग करके भिवानी में शामिल कर दिया गया।
हारपर...
महत्वपूर्णफैसलों में भी कॉरपोरेट स्टाइल में सर्वे और अन्य एजेंसियों के बजाय कार्यकर्ताओं के फीडबैक को महत्व दिया जाना चाहिए। इसका तीसरा संदेश यह है कि बड़ी-बड़ी बातें करने और कोरे आश्वासन देने के बजाय अपने चुनाव घोषणा पत्र और वायदों को पूरा करना चाहिए। इस ट्वीट का चौथा संदेश यह है कि जो लीडर देशभर में चुनाव लड़वाने और जिताने जाते हैं वे खुद अपना चुनाव नहीं जीत सकते। इसलिए देशभर के तमाम कार्यकर्ताओं को चुनाव के वक्त किसी एक प्रदेश में झोंकने के बजाय स्थानीय नेताओं को आगे बढ़ने और जनता का विश्वास हासिल करने का मौका दिया जाना चाहिए।