गर्भपात के लिए रेप पीड़ित रोहतक रेफर
बरवालाके एक गांव की दुष्कर्म पीड़ित 13 वर्षीय लड़की को आखिरकार शुक्रवार को सिविल अस्पताल से रोहतक पीजीआईएमएस रेफर कर दिया गया। पीड़िता पिछले 9 दिन से सिविल अस्पताल में भर्ती थी। कोर्ट ने परिजनों की सहमति पर दुष्कर्म पीड़ित किशोरी का गर्भपात करवाने की इजाजत दे दी थी। साथ ही मामले से जुड़े अहम साक्ष्य के लिए गर्भपात के बाद पुलिस को भ्रूण सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए थे। मगर अदालत के फैसले के बाद टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट और गर्भवती किशोरी की हालत को लेकर डॉक्टर यहां बच्ची का गर्भपात करने को लेकर पशोपेश में थे। मामले की पेचीदगी और समय के साथ किशोरी की हालत को देखते हुए शुक्रवार को गांव की पंचायत पीएमओ से मिली थी। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने उसे रोहतक रेफर कर दिया।
पीडि़ता के पिता ने बताया कि उसके गांव की पंचायत दोपहर को बेटी के मामले को लेकर पीएमओ से मिली थी। इसके बाद पीएमओ ने उसे रेफर कर दिया। सिविल अस्पताल के डॉक्टर्स मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट (एमटीपी) के कारण पीड़िता को गर्भपात नहीं कर रहे थे। जबकि कोर्ट पीडि़ता के परिजनों की सहमति पर उसके गर्भपात का फैसला सुना चुकी है। इसके बाद अस्पताल प्रशासन किसी किसी बहाने से गर्भपात से बच रहा था। वहीं प्रतिदिन पीड़िता की तबीयत भी खराब हो रही थी। डॉक्टरों का मानना था कि 20 सप्ताह के बाद गर्भपात कराने में बहुत ज्यादा जोखिम है। पीडि़ता 23 सप्ताह की गर्भवती है। वहीं मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट (एमटीपी) के तहत डॉक्टर गर्भधारण के बीस सप्ताह के बाद गर्भपात नहीं कर सकते हैं।
पड़ाेसी है रेप का अभियुक्त
17सितंबर को बरवाला के एक गांव की 8वीं की छात्रा ने पड़ोसी 55 वर्षीय निहाल सिंह पर दुष्कर्म करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था। आरोप था कि निहाल सिंह पिछले 6 माह से उसके साथ दुष्कर्म कर रहा है। इस संबंध में बरवाला थाना में आरोपी निहाल सिंह के खिलाफ दुष्कर्म सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया था। बाद में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। परिजनों को पीडि़ता काे पेट में दर्द की शिकायत बाद मामले का पता चला। इसके बाद पीड़ित छात्रा का चेकअप करवाया गया। इसमें पीड़िता कुछ माह की गर्भवती थी।