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नए शिक्षकों को जीजेयू ने फिर दिया नई कमेटी का झुनझुना
परीक्षा बहिष्कार की तैयारी
जीजेयू की ईसी की बैठक में मांगें नहीं हुईं पूरी
भास्करन्यूज | हिसार
जीजेयूने एक बार फिर नए शिक्षकों को ठेंगा दिया है। विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद की बैठक में बुधवार को नए शिक्षकों के एग्रीमेंट, बांड लेटर और सेल्फ फाइनेंस स्कीम को लेकर अहम फैसला होना था, मगर ऐसा नहीं हुआ। इन मुद्दों पर अपनी रिपोर्ट देने के लिए परिषद ने नई कमेटी का गठन कर दिया है। परिषद ने पिछले दिनों डॉ. नरसीराम बिश्नोई की अध्यक्षता में गठित कमेटी की रिपोर्ट को परिषद ने तवज्जो नहीं दी। अब राजस्थान विश्वविद्यालय के प्रो. एस गुप्ता की अगुवाई में नई कमेटी बना दी गई है। नए शिक्षकों की भर्ती के नियमों और कायदे कानून बनाने के लिए विश्वविद्यालय ने पांचवीं बार कमेटी का गठन किया है। इसे लेकर शिक्षक संगठन गजुटा ने अपनी गहरी नाराजगी जताई है।
दरअसल, जीजेयू के शिक्षक एक समान नीति बनाने की मांग कर रहे हैं। वे सेल्फ फाइनेंस स्कीम, एग्रीमेंट, बांड लेटर को रिवाइज करने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि उनमें सारी शर्तों और नियमों का उल्लेख नहीं है। इस वजह से शिक्षक वर्ग भविष्य में मिलने वाली सुविधाओं को लेकर आशंकित है। नेक टीम के दौरे से पहले गजुटा ने आंदोलन शुरू करके अपनी मांग पूरी करने का दबाव बनाया था। 3 नवंबर को प्रशासन को ज्ञापन देकर एक सप्ताह का समय दिया था। इसके बाद 13 14 नवंबर को सांकेतिक धरना दिया। फिर भी मांग पूरी नहीं हुई तो 26 नवंबर से 1 दिसंबर तक धरना, क्रमिक अनशन, आमरण अनशन शुरू किया।
गजुटा प्रधान अनिल भानखड़ ने कुलपति पर वायदाखिलाफी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वे परीक्षाओं को बहिष्कार भी कर सकते हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन चार बार कमेटी बना चुका है, लेकिन कोई भी नतीजा लेने से पीछे हट रहा है। उन्होंने बताया कि पहली कमेटी एसएल वर्मा की अध्यक्षता में बनाई गई थी जिसकी रिपोर्ट वीसी तक नहीं पहुंच पाई। इसके बाद रजिस्ट्रार की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई, जिसकी एक भी बैठक नहीं हुई। इसके बाद प्रोफेसर एमएस तुरान की अध्यक्षता में कमेटी बनी। फिर डॉ. नरसी राम की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई।