हिंसा के खिलाफ मुखर हों महिलाएं
जिलामहिला संरक्षण अधिकारी बबीता चौधरी ने कहा कि हमारा समाज पितृ सत्तात्मक समाज है। महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार मिलना तो दूर की बात है, मूलभूत संवैधानिक और मानवीय अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। वह बुधवार को जवाहर नगर स्थित सूबे सिंह स्मारक भवन में एक सेमिनार को संबोधित कर रही थीं।
मानवाधिकार दिवस पर जनवादी महिला समिति और प्रगति कानूनी सहायता केंद्र (प्रकासक) ने माई च्वाइस-माई राइट विषय पर सेमिनार का आयोजन किया था। बबीता ने कहा कि आज भी घरों में महिलाओं के साथ मारपीट की जाती है। उनको कुछ भी काम अपनी मर्जी से करने का अधिकार नहीं है। लड़कियों के स्वास्थ्य भविष्य की चिंता किए बगैर 18 वर्ष से पहले उनकी शादी कर दी जाती है। उन्होंने घरेलू हिंसा अधिनियम के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत महिलाएं अपने भाई, बेटे पति द्वारा की गई हिंसा के खिलाफ आवाज उठा सकती हैं।
सेमिनार में ये लोग पहुंचे
बंदिशें बर्दाश्त नहीं करेंगे : जाखड़
सेमिनार की अध्यक्षता प्रकासक की अध्यक्षा निर्मला देवी और साहित्यकार मधुसूदन पाटिल ने की। मंच संचालन महिला समिति की जिला सचिव सरोज सैनी प्रकासक की सचिव सुनीता सिवाच ने किया। सेमिनार में रामेश्वरदास, किसान नेता कृष्ण स्वरूप गोरखपुरिया, संतोष श्योकंद, एडवोकेट सोमदत सिवाच, एडवोकेट विक्रम मित्तल, शांति देवी, रजनी देवी, ओमप्रकाश सिवाच, ओमप्रकाश शर्मा, कमलेश कैमरी, भारती, सुनीता, सुदेश, दिनेश सिवाच, सुमन, सुषमा, ज्योति, सुमन रंगा अनिता सहित भारी संख्या में गणमान्य मौजूद थे।
जनवादी महिला समिति की प्रदेशाध्यक्ष शकुंतला जाखड़ सह सचिव शीलावंती ने कहा कि आजादी के सात दशक बीतने के बावजूद आज समाज में तथाकथित हिंदुवादी नेता लड़कियों को जींस-टॉप पहनने, मोबाइल फोन रखने, ड्रेस कोड लागू करने, लड़कियों को दुपट्टा अनिवार्य रखने जैसी नसीहतें दे रहे हैं। ऐसी बंदिशें बर्दाश्त नहीं करेंगे। हैरानी की बात यह है कि इस तरह के असंवैधानिक बयान देने वालों के खिलाफ प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। अपनी पसंद से शादी करने वाली लड़के लड़कियों को मौत के घाट उतारने, गांव से निकालने, उनकी संपत्ति हड़पने, भाई बहन बनाने जैसे दकियानूसी असंवैधानिक फरमान सुनाए जा रहे हैं। लड़कियों के साथ छेड़छाड़ गुंडागर्दी की घटनाएं दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। अब तो