पशु प्रेग्नेंसी जांच की घरेलू किट तैयार
केंद्रीयभैंस अनुसंधान केंद्र के विज्ञानियों ने पशुओं की घरेलू प्रेग्नेंसी जांच किट तैयार करने में काफी हद तक सफलता हासिल की है। इसकी मदद से पशु पालक पशु के गर्भाधान के एक माह के भीतर ही उसके गर्भवती होने का पता लगा सकेंगे। पशु को प्रेग्नेंसी जांच के लिए प्रयोगशाला या अस्पताल में नहीं ले जाना पड़ेगा।
अनुसंधान केंद्र के विज्ञानी दो साल से इस प्रोजेक्ट पर लगे हुए थे। इस रिसर्च में उन्हें सफलता मिल चुकी है। प्रेग्नेंसी किट का फार्मूला इजाद कर लिया गया है। अक्सर पशु की प्रेग्नेंसी रिपोर्ट का पता 60 से 90 दिन के बीच चलता है। यदि पशुपालक चाहे तो वह गर्भाधान से एक माह के करीब प्रोजस्टोन और पैग आधारित टेक्नोलॉजी से उसकी प्रेग्नेंसी का पता कर सकता है, लेकिन इसके लिए उसे पशु का ब्लड और दूध प्रयोगशाला में लाना होगा। अल्ट्रासाउंड विधि से पता करने के लिए पशु को प्रयोगशाला में लेकर जाना पड़ता है। इसमें काफी समय लग जाता है। अब केंद्रीय भैंस अनुसंधान केंद्र के विज्ञानियों ने इसे लेकर बड़ी रिसर्च की है। रिसर्च के दौरान विज्ञानी पशुओं की प्रेग्नेंसी का पता करने के लिए किट इजाद कर रहे हैं। अभी तक हुई रिसर्च में विज्ञानियों को सफलता मिली है। विज्ञानियों ने यह पता कर लिया है कि भैंस के मूत्र, दूध और खून के अलावा भी कई ऐसे पदार्थ हैं जिनसे प्रेग्नेंसी की जांच की जा सकती है।
दो साल पहले मिला था प्रोजेक्ट
केंद्रसरकार ने दो साल पहले हिसार के केंद्रीय भैंस अनुसंधान केंद्र और करनाल के राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान को पशु में जल्दी गर्भ जांच के लिए प्रोटीन की खोज परियोजना के नाम से चार साल का प्रोजेक्ट दिया था। करनाल में यह परियोजना डॉ. एके मोहंती और हिसार में डॉ. अशोक बलहारा के निर्देशन में चल रही है। हिसार के केंद्र को भैंस और करनाल को गाय की प्रेग्नेंसी किट पर रिसर्च करनी है। इसके लिए दो करोड़ का बजट जारी हुआ था।
^पशुओं की प्रेग्नेंसी किट को लेकर रिसर्च चल रही है। दो साल की रिसर्च के बाद विज्ञानियों को अब पचास फीसदी सफलता मिल चुकी है। आने वाले समय में पशुओं की प्रेग्नेंसी किट बनाना संभव होगी।’’
डॉ.इंद्रजीत सिंह, डायरेक्टर भैंस अनुसंधान केंद्र हिसार।
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