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अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु: मां परम ज्योति

7 वर्ष पहले
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राधाकृष्णसत्संग मंडल सेक्टर-13 हिसार प्रिया निकुंज कार्यकारिणी समिति के तत्वावधान में जारी श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के दूसरे दिन शनिवार को गुरु मां परम ज्योति ने श्रद्धालुओं को भागवत कथा का रसपान करवाया। उन्होंने कहा कि भागवत के एक सप्ताह तक श्रवण करने मात्र से धुंधकारी जैसे प्रेतात्मा को भी मुक्ति प्राप्त हो गई तो मनुष्यों के उद्धार में तो कोई संशय ही नहीं है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए क्योंकि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। अहंकार के वशीभूत होकर रावण ने सीता माता का हरण किया, जिसका दुष्परिणाम उसे अपने प्राण गांव देकर भुगतना पड़ा। गुरु मां ने कहा कि आज इंसान के पास सभी के लिए समय है लेकिन वो खुद के लिए समय नहीं निकाल पा रहा क्योंकि उसने कभी भी अपने अंदर झांककर नहीं देखा कि वह क्या है, वह यहां क्यों आया है और उसे क्या करना है। जब इस तरह के प्रश्न आप खुद से करेंगे तो आपके अंतर्मन में आध्यात्मिक की ऊर्जा का संचार होगा और आपको सभी भौतिक चीजें नाशवान प्रतीत होंगी। उन्होंने कहा कि खुद को जानना ही भगवान को जानना है।

मां परम ज्योति।