10 का वादा, 7 चलीं, अब सिर्फ 3
शहरकी जनता के साथ एक तगड़ा छल हो गया। जिम्मेदार और जनप्रतिनिधि खामोश रहे। रोडवेज ने 10 बसें चलाने का वाद किया। सात बसें चलाई गईं। जिनमें से फिलहाल महज तीन सिटी बस ही दौड़ रही हैं। ऐसे में ऑटो चालक अपनी मनमानी कर रहे हैं। जनता परेशान है और प्रशासन चुप।
जून से सिटी बस सेवा का शुभारंभ हुआ था। उस वक्त जनता काे सहूलियत देने के लिए ऑटो से आधे किराये पर सिटी बस के पांच रूट तय हुए थे। हालांकि विस चुनाव की गतिविधियां तेज हुई तो ऑटो चालकों ने राजनीतिक पार्टियों पर प्रेशर बताया। इसी बीच चुपके से अफसरों ने एक-एक करके बस कम करते रहे। कई रूट खाली हो गए तो ऑटो चालक इन रूटों से जनता की जेब ढीली करने में जुट गए। हालात यह हैं कि पांच बस ही शहर में रह गईं। हाल ही में एक बस जीजेयू में छात्रों की मांग पर लगा दी गई। इससे पूर्व एक बस स्टाफ के टोटे में बंद कर दी। अब जिंदल हॉस्पिटल रूट पर एक और गंगवा रूट पर दो बस ही रह गईं।
तीन कंडम बसें आईं थी
ये बोले नेता
ऑटो-जीपों पर असर
भास्कर ने चलाई थी मुहिम
वोट बैंक की राजनीति के कारण शहर के वरिष्ठ नेताओं ने सिटी बस में कभी दिलचस्पी नहीं दिखाई। जब कभी सिटी बस का मुद्दा उठाया, ऑटो रिक्शा यूनियनों ने आंदोलन की धमकी दी। बसों को रोकने तक की चेतावनी दी। वरिष्ठ नेताओं के दरवाजे खटखटा कर दबाव बनाया। नतीजतन, सिटी बसों की संख्या घटती चली गई।
तय हुए थे पांच रूट, शहर में किराया पांच रुपये
रूट के साथ बढ़ा भाड़ा
यहां भी राजनीति
^शहर की जरूरत को देख भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने खुद सिटी बस सेवा शुरू कराई थी। दस बसें चलाने के आदेश थे। शासन प्रशासन की जिम्मेदारी है कि सिटी बस सेवा बेहतर हो। धर्मबीरगोयत, जिलाप्रवक्ता, कांग्रेस।
^सिटी बस सर्विस की जरूरत है। अगर इनकी संख्या कम हुई है तो यह बात विधायक डॉ. कमल गुप्ता के संज्ञान में लाएंगे। डीसी रोडवेज जीएम से बात करेंगे। सुजीतकुमार, भाजपानेता।
सिटी बसों से केवल ऑटो रिक्शाओं के अलावा विभिन्न रूट पर अवैध तरीके से चलने वाली जीपों पर असर पड़ रहा था। हिसार हांसी, हिसार सिवानी और हिसार बरवाला रूट पर चलने वाले वाहन शहर के नजदीकी इलाकों की सवारियां भी बिठाते हैं।
गुड़गांव से जून माह में 10 सिटी बस आई थीं। इनमें से तीन बस कंडम थीं। हिसार रोडवेज प्रशासन ने इन बसों को वापस भेज दिया था। बाद में फिर तीन बस गुड़गा