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अपनों के पास पहुंची जिया, शिवन को बाबा का इंतजार
आठसाल की जिया अब खुश है। अपनों के पास पहुंच चुकी है। बारह साल का शिवन अब भी विचलित है। उसे अपने बाबा रामपाल का इंतजार है। ये दोनों बरवाला के सतलोक आश्रम पर पुलिस ऑपरेशन के बाद अपनों से बिछड़ गए थे। पुलिस ने 20 नवंबर को चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी के जरिये कैमरी रोड स्थित श्रीकृष्ण प्रणामी बाल आश्रम पहुंचाया था। जिया को तलाशते हुए उसके पिता भरतदास आश्रम पहुंचे और प्रमाण देने के बाद साथ छत्तीसगढ़ ले गए। शिवन वापस नेपाल नहीं जाना चाहता, हालांकि पुलिस परिचितों को खोज चुकी है।
भरतदास बोले : समझो अब मन हट गया
पिता बोला : भगदड़ में गोद से गिर गई थी जिया
शिवन बोला : बाबा के जेल से बाहर आने तक इंतजार करूंगा
मूलरूप से नेपाल शिवन के माता-पिता नहीं है, मगर पुलिस उसके परिचितों को तलाश लिया है। नेपाल के पोखरा इलाके में उसकी आंटी कमला रहती है। उनकी बेटी रेशमा का फोन भी शिवन के पास चुका है। वे उसे नेपाल बुला रहे हैं, मगर वह जाने को तैयार नहीं। वह कहता है, जब गुरुजी वापस सतलाेक आश्रम आएंगे तो वह भी आश्रम जाएगा। फिर से प्रसाद बांटने का काम करेगा। शिवन अखबार में रामपाल के खिलाफ खबरें पढ़ता है, मगर उसे किसी बात पर यकीन नहीं होता। उसके जहन से अब भी पुलिस ऑपरेशन का घटनाक्रम निकला नहीं है। वह बताता है, जब पुलिस ने आंसू गैस के गोले फेंके तो अंदर पंडाल में धुआं हो गया था। तब कमांडो अंकल सब बच्चों को छत पर ले गए। बच्चों को कपड़ा गीला करके आंखों पर लगाने को कहा था।
छत्तीसगढ़ की तहसील जंजीर चंपारण के गांव कुशमुल निवासी भरतदास ने बताया कि वह 3 नवंबर को अपनी प|ी तीनों बच्चों के साथ सतलोक आश्रम आया था। उनके साथ चचेरा भाई उसकी प|ी भी आए थे। 18 नवंबर को पुलिस फोर्स जब आश्रम पहुंची तो महिलाएं दरवाजे के बाहर बैठी थीं। जिया अपनी चाची छटभई की गोद में थी। वह खुद आश्रम के भीतर था। पुलिस ने जब आश्रम के बाहर से भीड़ काे खदेड़ा तो जिया गोदी से गिर गई। इसी दौरान पुलिस ने लोगों को बस में चढ़ाकर बरवाला थाना भेज दिया। वह भी आश्रम से निकल गया। बरवाला थाना पहुंचने के बाद वह बच्ची को ढूंढ़ता रहा। वह बेटी को तलाशने वापस आश्रम जा नहीं सकता था। कुछ दिन बाद उसे पता चला कि जिया कैमरी रोड श्रीकृष्ण प्रणामी आश्रम है। पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी की मदद से उसे बेटी वापस मिली।
पावर प्लांट में कार्यरत भरतदास