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हर माह होती थी 4 करोड़ की कमाई

7 वर्ष पहले
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अपनों के पास पहुंची जिया, शिवन जाने पर अड़ा

{ विशेष पाठ कराए जाने से एकत्रित होती थी मोटी रकम

बरवाला| सतलोकआश्रम में महीने में होने वाले तीन सत्संग रामपाल को मालामाल करने में प्रभावी योगदान देते थे। इस बात की जानकारी पुलिस पूछताछ में खुद आश्रम संचालक रामपाल ने दी है। रिमांड के दौरान पुलिस को रामपाल ने बताया कि आश्रम में हर माह 4 करोड़ की आय होती थी। ये आमदन मेरे द्वारा किए जाने वाले विशेष पूजा पाठ सदस्यता के नाम पर श्रद्धालुओं से लिए गए रुपयों से होती थी।

वहीं पुलिस ने रामपाल के आश्रम में विशेष सेविका बबीता उर्फ बेबी से रिमांड के दौरान 4 हार्ड डिस्क बरामद की है। पुलिस का कहना है कि इनकी जांच की जाएगी। जांच में उम्मीद है कि काफी राज सामने सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ पुलिस रामपाल को गुरुवार को हिसार अदालत में रिमांड अवधि की समाप्ति के बाद पेश करेगी। पुलिस का कहना है कि एक बार फिर रामपाल के रिमांड की मांग की जाएगी, क्योंकि जांच के कई पहलू अभी भी सामने आने बाकी है। रामपाल के आश्रम की अगर बात करें तो यहां तीन लेवल पर दीक्षा दी जाती थी। आश्रम में आने वाले अनुयायी को पहले चरण में साधारण सदस्यता मिलती थी। इसके तहत एक मंत्र दिया जाता था। तीन महीने के इस प्रावधान के लिए अनुयायी से 1 हजार रुपए लिए जाते थे। इन तीन महीनों में अनुयायी की परख होती थी, उसके बाद ही उसका अगला लेवल यानि सत्यनाम देने का प्रोसेस शुरू होता था। सदस्यता के तीन माह बाद अनुयायी को सत्यनाम दिया जाता था। एक तरह से यह आश्रम में महत्वता बढ़ाने वाला लेवल था। सत्यनाम के बाद का लेवल सारनाम है। सत्यनाम की परीक्षा पास कर चुके श्रद्धालुओं को ही सारनाम दिया जाता था।

आश्रम में रामपाल की तरफ से लाइलाज बीमारियों को दूर करने का भी दावा किया जाता था। इसके लिए अनुयायी को एक स्पेशल पाठ करवाना होता था। इस पाठ की कीमत 10 हजार रुपए थी। यानि पहले सदस्यता फिर स्पेशल पाठ करवाना रामपाल की आय का स्त्रोत मुख्य स्त्रोत था।

नहीं मनाते थे दिवाली-होली

डेढ़साल से सतलोक आश्रम में रहे शिवन ने बताया कि दिवाली और होली जैसे त्योहार आश्रम में नहीं मनाए जाते थे। केवल सत्संग होता था। उसने बताया कि आश्रम में कई सेवादार रहते थे। उनके सोने का इंतजाम पंडाल में होता था। पंडाल में आकर गुरुजी दर्शन देते थे। सेवादार गुरुजी की कोठी की तरफ नहीं