स्ट्रॉबेरी का हब बन रहा है हिसार एक एकड़ में 2 से 3 लाख कमाई
हिसारधीरे-धीरे स्ट्रॉबेरी का हब बनता जा रहा है। गांव स्याहड़वा के बाद सातरोड़ और शिकारपुर में भी किसान स्ट्रॉबेरी की ओर रूझान कर रहे हैं। दूसरी फसलों के मुकाबले यह फायदे का सौदा सिद्ध हो रही है। सातरोड गांव और शिकारपुर में केवल स्थानीय किसान अपितु दूसरे जिलों के किसान भी यहां जमीन ठेके पर लेकर स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं। प्रति एकड़ 7 से 8 लाख रुपए तक की पैदावार होती है। इसमें खर्चा निकालकर 2 से 3 लाख रुपए का फायदा किसान को होता है। खेत में स्ट्रॉबेरी तैयार होने के बाद इसकी प्रति डिब्बा 250 ग्राम पैकिंग की जाती है और दिल्ली आजादपुर सब्जी मंडी में बेचने के लिए भेज दी जाती है। स्ट्रॉबेरी प्रति किलो तीन सौ रुपए तक बिक जाती है। कई बार 700 रुपए प्रति किलोग्राम बिकता है।
स्ट्रॉबेरी मेंस्वीट चार्ली और विंटर डाउन कीमती वैरायटी में गिनी जाती है। जबकि काडलर, रानिया, मोखरा समेत कई वैरायटियां स्ट्रॉबेरी की होती हैं। रायपुर ढाणी के सुभाष और सातरोड के हवासिंह का कहना है कि स्ट्रॉबेरी को मीठे पानी की जरूरत होती है। गांव शिकारपुर में किसान रामनिवास सैनी ने जमीन ठेके पर लेकर खेती की हुई है। रायपुर ढाणी के सुभाष ने स्ट्रॉबेरी के साथ खीरे की खेती की है। उसके लिए दोनों ही फायदे का सौदा है। बलराज दूसरे किसान भी स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं।
पौधे हिमाचलसे लाए जाते हैं। वैरायटी के अनुसार प्रति पौधा 10 रुपए से लेकर 30 रुपए तक के बीच पड़ता है। यह पौधा दोमट मिटटी में ही लगाया जा सकता है। पौध लगाने के बाद 20 दिन तक फव्वारा लगाया जाता है। छोटे बच्चे की तरह इसकी परवरिश की जाती है। रोपाई का काम अक्टूबर-नवंबर में किया जाता है। जनवरी और फरवरी माह में यह तैयार होकर फल दे देती है।