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स्कूली बच्चों को भा रही संस्कृत, पंजाबी, उर्दू से कर रहे किनारा

Hisar News - कॅरिअरके तौर पर युवा भले ही साइंस और अंग्रेजी को ज्यादा तव्वजो देने का दम भरते हों, मगर सरकारी स्कूलों में पढ़ने...

Dainik Bhaskar

Jul 27, 2016, 03:00 AM IST
स्कूली बच्चों को भा रही संस्कृत, पंजाबी, उर्दू से कर रहे किनारा
कॅरिअरके तौर पर युवा भले ही साइंस और अंग्रेजी को ज्यादा तव्वजो देने का दम भरते हों, मगर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को संस्कृत भाषा भी खूब भा रही है। नौवीं से लेकर बारहवीं कक्षा तक लिए जाने वाले सभी एच्छिक विषयों में जिले में संस्कृत विषय सबसे ज्यादा विद्यार्थियों के पास है जिनकी संख्या 6 हजार 444 है। संस्कृति की तुलना में ड्राइंग और फिजिकल एजुकेशन भी कहीं पीछे है। वहीं जिले में मात्र 69 बच्चों के पास पंजाबी विषय है, लेकिन जिले में नौवीं से 12वीं तक किसी भी विद्यार्थी के पास एच्छिक विषय के तौर पर उर्दू नहीं हैं। पुरानी मान्यता और प्रमाणों के आधार पर तो संस्कृत भाषा का महत्व माना ही जाता है, वहीं स्कूली आंकड़े भी दिखा रहे हैं संस्कृत भाषा को पढ़ने के लिए स्कूली विद्यार्थियों में रुचि अभी भी बनी हुई है।

संस्कृतका इसलिए ज्यादा महत्व

विशेषज्ञोंके अनुसार संस्कृत भाषा देवों की भाषा है, क्योंकि संस्कृत भाषा का अविष्कार सबसे पहले हुआ था। संस्कृत में ही ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अर्थ वेद की रचना भी हुई। इसके अलावा ऋग्वेद की ऋचाओं से व्याकरण, छंद, अलंकार के निर्माण होने से भाषा और भी परिपूर्ण हो गई। यही कारण है कि संस्कृत भाषा में कहीं भी त्रुटि देखने काे नहीं मिलती। संस्कृत भाषा को दूसरी भाषाओं की जननी भी माना जाता है, क्योंकि कई नए शब्दों का निर्माण संस्कृत से ही हुआ है। महाभारत, रामायण को भी सबसे पहले संस्कृत में ही लिखा गया।

वैज्ञानिकों का भी मानना है कि संस्कृत भाषा के कई शब्द संस्कृत में लिखे गए शोध बहुत ही महत्वपूर्ण है। संस्कृत भाषा के शब्दों का उच्चारण करने से वातावरण में एक सकारात्मक ऊर्जा का सृजन होता है। इसके अलावा आयुर्वेद पद्धति भी संस्कृत भाषा में लिखी गई। तो ज्योतिषीय आंकड़ों कर्मकांड जैसे कार्यों को संस्कृत में ही लिखा गया है।

नौवीं-दसवीं कक्षा के आंकड़े एक नजर में

विषयविद्यार्थी

संस्कृत 6444

होम साइंस 461

ड्राइंग 1513

पंजाबी 69

म्यूजिक 21

उर्दू 00

फिजिकल एजुकेशन 3810

नोट: ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा में भी संस्कृत विषयों की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 5 हजार 719 हैं जाे बाकी विषयों की तुलना में कहीं ज्यादा है।

विदेशी प्रचलित गायिका मडोना भी संस्कृत भाषा की मुरीद है उन्होंने संस्कृत में अष्टांगी गीत पहले लिखा भी और गाया भी। वहीं 1985 में कैलिफोर्निया के रिक वर्गीस शोधार्थी ने परिणाम में यह बताया है कि संस्कृत का निर्माण किसी व्यक्ति द्वारा नहीं किया गया। अन्य कई देशों में संस्कृत की लिपि का विभाजन कर नए अविष्कार करने पर काम किया जा रहा है। वहीं इसकी तुलना में भारत देश के युवाओं में संस्कृत भाषा का क्रेज नहीं है।

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