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लोहारी राघो गांव में दादा के काज में हुआ पोती का ब्याह

4 वर्ष पहले
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दादाके काज में पोती का का ब्याह। सुनने में बेशक अटपटा लगे, लेकिन नारनौंद के गांव लोहारी राघो में एक परिवार ने एेसा करके समाज के सामने नई नजीर पेश की है। शुक्रवार पांच मई को काज की परंपराओं को निपटा कर परिवार ने बेटी को खुशी-खुशी विदा किया। लाहोरी राघो निवासी वजीर सिंह की पुत्री का रिश्ता लगभग छह माह पहले हांसी के पास स्थित एक गांव में तय हुआ था। मगर फिलहाल शादी तय नहीं की थी। वजीर सिंह के पिता लगभग 68 वर्षीय तेलूराम का 30 अप्रैल को आकस्मिक निधन हो गया था। दाह संस्कार के समय एकत्रित हुए रिश्तेदारों परिवार के सदस्यों ने उसी वक्त आपसी सलाह मशविरा करके पांच दिन के बाद पांच मई का काज तय किया। इसी बीच परिवार की आर्थिक स्थिति और परिस्थितियों को देखते हुए किसी रिश्तेदार ने काज के समय सभी रिश्तेदारों के एकत्रित होने को देखते हुए काज के साथ-साथ तेलूराम की पोती का विवाह भी उसी दिन करने की सलाह दी। छोटे-मोटे विरोध के बाद परिवार ने इसकी सहमति दे दी।

फैसला सराहनीय है, सीख लेने की जरूरत

^लोगोंको अपनी सुविधा के अनुसार सब कुछ करना चाहिए। तेलूराम के परिवार ने अपनी जरूरत के हिसाब से दादा के काज के बाद उसी दिन पोती का विवाह किया है। यह स्वागत योग्य कदम है। दूसरे लोगों को भी इससे सीखने की जरूरत है।\\\'\\\' चंद्रकांताचानना, सरपंच, गांव लाेहारी राघो।

हिसाब से परंपराएं निभाएं

^काजअौर शादी में दिखावे के लिए लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं। अपनी जरूरत के हिसाब से परंपराओं को निभाना चाहिए। इस पहल का अनुसरण करना चाहिए।\\\'\\\' ब्रह्मदेवस्याहड़वा, चेयरमैन, जिला परिषद।

भट्ठे पर काम करता है परिवार

समाजके सामने एक नई परंपरा और नजीर पेश करने वाला यह परिवार ज्यादा शिक्षित और उच्च स्तर का जीवन जीने वाला परिवार नहीं है। यह परिवार ईंट भट्ठे पर काम करता है। बावजूद फैसला लेकर उन्होंने एक नई तस्वीर भी पेश की है।

काज के नाम पर लाखों रुपए पानी की तरह बहाए जाते हैं। यहां तक कि कई गांवों का एक साथ भोज किया जाता है। इसी प्रकार शादी-विवाह में बड़े-बड़े बैंक्वेट हाॅल बुक करके और ढाेल नगाड़ों का दिखावा किया जाता है। ऐसे में लोहारी राघो के नायक बिरादरी के परिवार की यह पहल समाज को नया रास्ता दिखा सकती है।

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