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परमात्मा को याद करने से आत्मा होती है संतुष्ट

5 वर्ष पहले
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प्रजापिताब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से सेक्टर 15 में रविवार को एक आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें ब्रह्माकुमारी वंदना बहन ने कहा कि जिस ‘शिव’ की पूजा की स्तुति में भजन गाए, व्रत रखे, तीर्थ यात्राएं की। वही शिव परमात्मा इस धरा पर अवतरित होकर ज्ञान की गंगा बहा रहे हैं। अत: अभी भी समय है अपनी ‘अक’ रूपी बुराइयों को परमात्मा पर अर्पित करके उससे संबंध जोड़ कर उस परमपिता को याद करो। अपने लिए एक घड़ी, आधी घड़ी समय अवश्य निकालिए। परमात्मा की याद एवं ज्ञान का प्रतिदिन स्मरण करने से जीवन में तृप्ति आती है। आत्मा संतुष्ट हो जाती है। इच्छाओं के पीछे भागने वाला मनुष्य कभी भी सुखी नहीं रह सकता। परमात्मा की याद और हमारे द्वारा किए गए पुण्य कार्य ही हमारी अविनाशी कमाई है। जो मृत्यु के पश्चात भी साथ जाएगी। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी सुनंदा बहन ने भी प्रवचन किए। उन्होंने कहा कि खाना बनाते समय परमात्मा को याद करते रहें तो भोजन प्रभु प्रसाद बन जाएगा। खाना खाते समय में भी परमात्मा को याद करते रहें। इस प्रकार से भोजन करना हमारे मन को शांत शीतल बना देगा। उन्होंने कहा कम बोलो, धीरे बोलो, मीठा बोलो। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलित करके ब्रह्माकुमारी वंदना बहन ने किया और कार्यक्रम के अंत में शिव ध्वज लहराया गया। इस दौरान प्रो. सुदक्षणा बामल के गीतों ने सभी श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। इस अवसर पर अर्जुन महता, भगवानदास, देशराज भाटिया, प्रेम, धर्मेंद्र, पुष्पा मिश्रा, संध्या, लक्ष्मी सरदाना, अलका, कौशल्या, सरोज, शांता, उर्मिल, प्रोमिला, वीरा देवी, वर्षा, चंद्रकला, फूला स्नेहा सहित अन्य मौजूद रहे।

सेक्टर-15 में आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रम के दौरान मौजूद श्रद्धालु।

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