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...लोग तो मुंह फेर कर चल देते हैं, आवाज देकर बुलाना आदत है मेरी

5 वर्ष पहले
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हंसना-हंसानाआदत है मेरी, अपना बनाना आदत है मेरी, लोग तो मुंह फेर कर चल देते हैं, आवाज देकर बुलाना आदत है हमारी। कुछ इन्हीं अल्फाजों के साथ हास्य कवि अनिल अग्रवंशी ने भारत विकास परिषद की ओर से लाहौरिया स्कूल में आयोजित हास्य कवि सम्मेलन की शुरुआत की। भारत विकास परिषद की ओर से इससे पूर्व मेडिकल कैंप, रक्तदान शिविर और कृत्रिम अंग वितरण समारोह का भी आयोजन किया गया। रविवार शाम को हास्य कवियों की महफिल सजी। इसमें कवि प्रताप फौजदार, गजेंद्र सोलंकी, डॉ. रमेश उपाध्याय, चरणजीत चरण बलजीत कौर शामिल थी। दिल्ली से आई बलजीत कौर ने कहा कि किसी को चाह लो तो चाहत हो जाती है, अपना बना लो तो आदत हो जाती है। मैंने जान लिया दिल में रहता है खुदा, लोगों को हंसा लो तो इबादत हो जाती है। इस पर उपस्थित श्रोताओं ने जमकर वाहवाही लुटाई।

वहीं कवि चरणजीत चरण ने आतंकियों के समर्थन में नारे लगाने पाकिस्तान के झंडे लहराने के मामले को उठाते हुए कहा होना चाहिए हर राष्ट्रद्रोही बेनकाब, देशद्रोह का जो दिल में दबाए राज है। कैसे मान ले उन्हें देश के सपूत, जिन्हें राष्ट्र गान गाने में भी एतराज है। इसके अलावा राजस्थान से आए डॉ. रमेश उपाध्याय बांसुरी ने जब ब्रज भाषा में कविता सुनाते हुए कहा कि बैरी ने बैर निकारम कारन, कान के कान में फूंक लगाई, फूंक ने फूंक दई सगरी, मोय फूंकत-फूंकत राख बनाई। तो उपस्थित लोगों ने जमकर तालियां बजाई। रविवार शाम को शुरू हुई इस शाम में मुख्य अतिथि के रूप में सांसद दुष्यंत चौटाला को आना था लेकिन उनके स्थान विधायक रणबीर सिंह गंगवा ने कार्यक्रम में शिरकत की। इसके अलावा एचएयू के कुलपति डॉ. केएस खोखर लुवास के कुलपति श्रीकांत शर्मा, सुरेन्द्र लाहौरिया, सुरेन्द्र कुच्छल, हरीश शर्मा, अनुपमा अग्रवाल, रामनिवास अग्रवाल सूर्या गोयल आदि भी उपस्थित थे।

पहले ही गोली चला देते तो ये नौबत ना आती

हास्य कवि प्रताप फौजदार में चुटकलों के बीच जेएनयू के मामले को भी उठाया। उन्होंने कहा कि अगर जम्मू-कश्मीर में आतंकियों समर्थन करने वाले अौर पाकिस्तान का झंडा फहराने वालों को कड़ा सबक दिया जाता तो आज जेएनयू जैसी घटनाएं नहीं होती। अहिंसक होने से युद्ध नहीं जीते जाते उसके लिए हथियार उठाना ही पड़ता है।

{ कवि सम्मेलन में छाया आतंकियों के समर्थन

में नारों का मामला

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