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फ्रंट पेज के शेष

5 वर्ष पहले
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हिसार-भिवानीरेलवे मार्ग पर मय्यड़ रेलवे स्टेशन से करीब 200 मीटर दूर ट्रैक पर डेरा डालने से पहले जाटों ने भगाना गांव के खेतों में रैली की। इसमें केंद्र राज्य की भाजपा सरकार को जमकर कोसा। मुर्दाबाद के नारे लगाए। रैली के बैनर पर बिश्नाई, त्यागी, रोड, जट्‌ट सिख मुला जाट जातियों को भी आरक्षण की पैरवी की गई है। बिश्नोई समाज के केडी बिश्नोई जाटों का समर्थन करने भी पहुंचे। आसपास के गांवों के जाटों ने प्रदर्शनकारियों के खानपान की व्यवस्था कर दी है। ट्रैक के पास दरियां बिछा दी गई हैं। रात के लिए रजाइयां चुकी हैं। धरनास्थल पर लाइट के लिए जनरेटर भी लगा गया है। केंद्र और राज्य में आरक्षण की मांग कर रहे जाटों ने 19 फरवरी, 2012 को मय्यड़ के पास रामायण रेलवे ट्रैक पर डेरा जमाया था। उस आंदोलन के एक साल बाद जाटों को पहले राज्य में फिर केंद्र में आरक्षण मिल गया था, लेकिन मार्च, 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था।

स्नैपडीलकी...

इसकेबाद उसका मोबाइल स्विच ऑफ हो गया। उसकी सहेली को हिंडन से पहले ही ऑटो ड्राइवर ने जबरन उतार दिया था।’ घटना के बाद पुलिस ने अपहरण की रिपोर्ट दर्ज की थी। दीप्ति की वापसी के बाद गाजियाबाद के एसएसपी धर्मेंद्र सिंह करीब 12 बजे उसके घर उससे मिलने पहुंचे। उन्होंने मीडिया को बताया कि दीप्ति का सकुशल लौटना बड़ी बात है। उसे किसी भी तरह का नशीला पदार्थ नहीं खिलाया गया। ही उसके शरीर पर किसी चोट के निशान हैं। घटना का सच जानने के लिए जरूरत पड़ने पर दीप्ति से पूछताछ भी की जा सकती है।

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