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सरकार स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करे: हरपाल

5 वर्ष पहले
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लघु सचिवालय के बाहर टैंट लगाकर मांगों को लेकर धरने पर बैठे किसान।

तेज किया जाएगा आंदोलन

बकायामुआवजा दिए जाने, लावारिस पशुओं की रोकथाम, पूरा नहरी पानी, मनरेगा को नियमित चलाए जाने वर्तमान 2016 की सूखे से खराब रबी फसलों की विशेष गिरदावरी करवाए जाने आदि मांगों को लेकर लघु सचिवालय पर किसानों का पड़ाव दूसरे दिन भी जारी रहा। धरने पर किसान नेताओं ने कहा कि आने वाले समय में यह आंदोलन ओर तेज किया जाएगा। किसानों को फसल राम भरोसे है। पहले तो लावारिस पशुओं से फसलों को बचाने के लिए सर्दी की रातों में जागते रहे। अगर उनसे बच गई तो प्राकृतिक आपदा का डर लगा रहता है। यही नहीं अगर यहां से बच गए तो बीमारियां फसलों को छोड़ देगी इसकी कोई गारंटी नहीं है। किसान को हर पल मरना पड़ता है लेकिन सरकार को उसकी समस्याओं से कुछ लेना-देना नहीं है। धरने को आरसी जग्गा, सुरेन्द्र मान, डॉ. अर्जुन सिंह राणा, दिनेश सिवाच, अनिल लितानी, प्रदीप सिंह, दयानंद पूनियां, जयसिंह पूनियां, रामस्वरूप भूना, विनोद सुलचानी, मोलड़ सिंह, राजकुमार सिरसा, सूबेसिंह बूरा, दयानंद चमार खेड़ा, डाॅ. बलबीर सिंह बहल धर्मपाल सिंघवा ने संबोधित किया।

पड़ाव डाले बैठे किसानों के लिए लघु सचिवालय परिसर में ही रहने, खाने सोने का बंदोबस्त किया हुआ था। दोपहर को कढ़ी और रोटी परोसी गई। साथ में प्याज और गुड़ की भी व्यवस्था थी। पड़ाव को देखते हुए तैनात किए पुलिस बल के जवानों को भी किसान नेता खाना खाने का आॅफर देते रहे।

प्राकृतिक आपदाओं बीमारी से अगर फसल बचकर मंडी में पहुंच भी गई तो वहां किसान को भाव मार देते हैं। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार अगर किसान को फसल लागत के अतिरिक्त 50 प्रतिशत मूल्य जोड़कर फसल के दाम तय किए जाए।

भास्कर न्यूज | हिसार

अगरसरकार किसानों का भला करना चाहती है तो स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को तुरंत हूबहू लागू करना चाहिए। मगर सरकार किसानों के प्रति कितनी संजीदा है इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर हिसार में होते हुए भी आंदोलनरत किसानों से मिलने के लिए नहीं पहुंचे। यह बात किसान सभा के राज्य महासचिव हरपाल सिंह ने दैनिक भास्कर के साथ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर बातचीत करते हुए कही।

हरपाल ने कहा कि अब तक जितनी भी फसल बीमा योजनाएं बनाई गई हैं, वह सारी किसानों को फायदा देने के बजाए कंपनियों के हित साधने वाली हैं। किसी भी किसान को आज तक फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिला। अगर किसी किसान को मिला होगा तो वह 100-150 एकड़ वाला किसान होगा।

हरपाल सिंह ने बताया कि फसल बीमा योजना के तहत जब किसान से फसल का प्रीमियम लिया जाता है तो वह प्रति एकड़ की दर से होता है, परंतु जब मुआवजा देने की बात आती है तो खराबा पूरे ब्लाक या आसपास के चार गांवों को देखा जाता है कि वहां फसलें खराब हुई है या नहीं। ऐसे में मरता केवल किसान ही है। यही नहीं बीमा कंपनियां एरिया वाइज एक ही फसल मुआवजे के लिए देखती है परंतु जरूरी नहीं कि सभी किसान एक ही फसल की बिजाई करें।

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