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सचिवालय में धरना स्थल से दूसरे दिन भी नहीं उठा मनोज का शव

5 वर्ष पहले
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भगानाप्रकरण को लेकर लघु सचिवालय के गेट पर चल रहे धरने पर रखा मनोज का शव दूसरे दिन भी नहीं उठ सका। पीड़ित परिवार मृतक का अंतिम संस्कार करने के लिए तैयार नहीं है। शुक्रवार को एसडीएम अशोक बंसल एवं डीएसपी जयपाल सिंह एवं बरबाला के तहसीलदार राजेश कुमार पीड़ित परिवार से मिले और शोक प्रकट किया।

मृतक के परिजनों ने अधिकारियों के सामने परिवार को दस लाख आर्थिक सहायता परिवार के एक सदस्य को नौकरी दिलवाने तथा गांव की अन्य समस्याओं बारे अवगत कराया। अधिकारियों ने मृतक के परिवार के सदस्यों को आश्वासन दिया की उनकी मांगों को उचित माध्यम से सरकार तक पहुचा दिया जाएगा और मृतक के इलाज पर जो दवाईयों आदि का खर्चा हुआ है उसकी भी अदायगी कर दी जाएगी। अधिकारियों ने मृतक का अतिंम सस्कार करने की की बात कही। लेकिन परिवार ने पुलिस प्रशासन की बात को ठुकरा दिया। देररात तक पुलिस प्रशासन के अधिकारी धरनास्थल के निकट डेरा डाले रहे।

ये था भगाना के मनोज की मौत का मामला

दिल्लीजंतर-मंतर पर बैठे भगाना गांव के दलित पिछले लंबे समय से दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना रत है। भगाना कांड के पीडि़त मनोज पुत्र बलराज जिसे धरने पर लगातार स्वास्थ्य खराब होने के कारण दिल्ली के नाम मनोहर लोहिया हस्पताल में दाखिल करवाया गया था और डॉक्टरों ने उसके इलाज के लिए 1 लाख 52 रुपये भी जमा करवा लिए लेकिन 15 दिन दाखिल रखने के बाद भी उसे बचाने में नाकामयाब रहे।

4 साल से लगातार धरने पर बैठे पीड़ित परिवार

संजयचौहान के ने बताया कि 21 मई 2012 से भगाना के पीडि़त दलित लगातार हिसार दिल्ली धरना दे रहे हैं। सरकार प्रशासन की अनदेखी संवेदनहीनता का खामियाजा उन्हें अपने परिवार के एक सदस्य को खोकर भुगतना पड़ा है। मनोज की मौत इसका जीता-जागता सबूत है कि प्रदेश केंद्र सरकार दलित पिछड़ी जाति की कितनी हितैषी है और इसके लिए पूरा सिस्टम दोषी है।

भगाना के युवक की मौत पर उसके परिजनों को सांत्वना देते एसडीएम अशोक बंसल अन्य अधिकारीगण।

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