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पांच साल के बाद पूर्व कमांडेंट सांगवान फिर पुराने ट्रैक पर

5 वर्ष पहले
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प्रदर्शनकारियों को देखकर लौट गए यात्री

जाट आरक्षण

आंदोलन

अधिकारी पहुंचे, पर नहीं बनी बात

हरियाणामें सबसे पहले जाट आरक्षण की मुखर आवाज उठाने वाले पूर्व कमांडेंट हवा सिंह सांगवान फिर से आंदोलन के पुराने ट्रैक पर हैं। मय्यड़ में रेलवे ट्रैक जाम करके सांगवान ने आरपार की लड़ाई का ऐलान किया है। शुक्रवार देर रात ट्रैक के पास धरने पर बैठे सांगवान ने संभावना जताई हैं कि एक दो दिन में आंदाेलन पूरे राज्य में फैल जाएगा।

सांगवान आरक्षण को लेकर लगातार कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई लड़ते रहे हैं, लेकिन उन्होंने 2011 के बाद सड़क पर उतर कर आंदोलन नहीं किया। सांगवान ने पिछला आंदोलन 6 मार्च, 2011 को किया था। तब 14 जगहों पर ट्रेनें रोकी गई थी। 20 दिन तक चले आंदोलन के दौरान भूख हड़ताल करते हुए माहूवाला में विजय सिंह कड़वासरा की मौत हुई थी। इससे पहले उनका पहला आंदोलन 13 सितंबर, 2010 को शुरू हुआ था, जो काफी हिंसक रहा था। पुलिस की गोली से सुनील श्योराण की मौत के बाद पूरे प्रदेश में आरक्षण की आग भड़क गई थी। राज्य के हर कोने में आगजनी-तोड़फोड़ की घटनाएं हुई थीं। इन आंदोलनों में जाटों के राष्ट्रीय नेता यशपाल मलिक साथ थे।

2011 के बाद से सांगवान अब सड़क पर उतरे हैं। अब हरियाणा का जाट आंदोलन भी एक हाथ में नहीं है। आंदोलन की बागड़ोर तीन प्रमुख खेमों के हाथों में हैं। तीनों के बीच वर्चस्व की लड़ाई भी चल रही है। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक और प्रदेशाध्यक्ष हवा सिंह सांगवान के अलावा नफे सिंह नैन-सूबे सिंह समैण की सर्व खाप (समस्त जाट समाज) का भले ही मकसद एक है, मगर राहें जुदा हैं। 15 फरवरी काे हरियाणा बंद का ऐलान करने वाली सर्व खाप मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात के बाद 31 मार्च तक आंदोलन टाल चुकी है। ऐसे में 12 फरवरी को सांगवान की बारी थी। अगर शुक्रवार को सांगवान आंदोलन से पीछे हट जाते तो उनका आधार खिसकने का पूरा खतरा था।

इसकी एक बड़ी वजह है। 21 फरवरी काे यशपाल मलिक आरक्षण की मांग पर मय्यड़ में रैली करने वाले हैं। वह ऐलान कर चुके हैं-मय्यड़ रैली में बड़ा फैसला करेंगे और वहां से दिल्ली, यूपी, पंजाब समेत बाकी राज्यों में आंदोलन फैलेगा। अब सांगवान ने मलिक ने पहले मय्यड़ में डेरा डालकर मलिक के लिए मुश्किल पैदा कर दी है। अगर सांगवान का आंदोलन लंबा चलकर 21 तक पहुंच गया तो मलिक कैसे मय्यड़ में अलग से अपनी रैली का तंबू गाढ़ेंगे। अगर अलग मंच लगाया तो इससे जाटों के बीच फूट खुलकर सामने आएगी। दूसरा, प्रदेश सरकार से कोई आश्वासन मिलने के बाद सांगवान अपना आंदोलन खत्म भी करते हैं तो कई ऐसे सवाल उठेंगे, जो सांगवान के सामने उठ रहे हैं।

सांगवान को इस सवाल का सामना करना पड़ रहा है कि सरकार ने चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया हुआ है, जो 31 मार्च तक अपनी रिपोर्ट देगी, फिर उससे पहले आंदोलन की जरूरत क्या है। ऐसी बातें अप्रत्यक्ष तौर पर शुक्रवार को भगाना रैली में भी उठी। सर्वखाप के साथ मुख्यमंत्री से बातचीत में शामिल रहे जाट नेता पवनजीत बनवाला ने रैली में कहा कि सीएम के साथ वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु, कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने आश्वासन दिया है कि आठ राज्यों के साथ हरियाणा को भी मिलेगा। दूसरी तरफ दलाल खाप के संयोजक कैप्टन मान सिंह दलाल ने मुख्यमंत्री के साथ बातचीत को दोहराया। दलाल ने कहा, यूपी को मिलने के बाद आरक्षण दिलवा देंगे।

इसका जवाब सांगवान ने रैली के मंच से दिया। कहा, यही धोखा है। हम समय निर्धारित नहीं करवा रहे। बस एक बात चाहते हैं, जब यूपी को आरक्षण मिलेगा तो हरियाणा को भी मिलेगा। इस विषय पर भास्कर संवाददाता से बातचीत में सांगवान ने कहा कि संसद में प्राइवेट बिल पेश करके यूपी के जाटों समेत आठ राज्यों को 31 मार्च से पहले आरक्षण मिल गया तो फिर हरियाणा को नहीं मिलेगा। तभी वह एक ही भरोसा सरकार से लेना चाहते हैं कि केंद्र में यूपी को आरक्षण का लाभ मिलेगा तो हरियाणा को भी मिलेगा। क्योंकि केंद्र में हरियाणा को मिल गया तो राज्य में खुद मिल जाएगा।

सांगवान बोले - लाठी क्यों नहीं लाए

पूर्व कमांडेंट सांगवान ने कहा- जाटों से पहले ही आह्वान किया था कि वे लाठियां लेकर रैली में आए। आप लोग खाली हाथ गए, मगर वह खुद जेली लेकर आए हैं। चूंकि आप लोग लाठी नहीं लाए, इसलिए वह अपनी जेली कार में रख आए। साथ ही कहा, अनुशासन में रहना है। आगजनी और तोड़फोड़ नहीं करनी है।

मय्यड़ में भी कई यात्री ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। जब ट्रैक पर आंदोलनकारी बैठ गए तो यात्री कहने लगे कि अब तो गाड़ी ट्रैक पर कैसे आएगी और यात्री वापस लौट गए। रेलगाड़ियां जब शुक्रवार शाम को प्रभावित हुईं तो यात्रियों ने ट्रेन से जाने का रास्ता ही बदल दिया। यात्रियों ने रोडवेज की बसों से जाना मुनासिब समझा।

मय्यड़ में रेलवे ट्रैक के पास डेरा डालने के लिए पहुंचे जाट समाज के लोगोां की अगुवाई करते हुए अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष पूर्व कमाडेंट हवा सिंह सांगवान।

मौके पर हवा सिंह सांगवान से बात करने पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट और अन्य अधिकारी। फोटोदामोदर माधव

हिसार. मय्यड़ में रेलवे ट्रैक के पास महिलाएं नारेबाजी करती हुईं।

पुलिस के साथ टकराव में सुनील श्योराण की मौत के बाद प्रदेशभर में फैली थी आंदोलन की चिंगारी, फिर 2011 में राज्य में 14 जगहों पर 20 दिन तक रोकी रेलगाड़ियां, भूख हड़ताल के दौरान एक आंदोलनकारी विजय कड़वासरा की हुई थी मौत। तब हवा सिंह सांगवान अौर यशपाल मलिक मिलकर चलाते थे आंदोलन, अब दोनों का मकसद एक-राहें जुदा

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