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जरूरतमंद बच्चे का इलाज करा बचाई जान

5 वर्ष पहले
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मददके हाथ जब जरूरतमंदों तक पहुंचते हैं तो आंखों से प्यार की आंसू छलक पड़ते हैं। यह खुशी किसी से छिपी भी नहीं रहती है। दरअसल, वेलेंटाइन डे से पहले आठ साल के एक बच्चे की सहायता के लिए युवाओं और सदभावना की टीम आगे आई।

हम बात कर रहे हैं क्रांतिमान पार्क के पीछे टैक्सी स्टैंड झोपड़ पट्टी में रहने वाले आठ वर्षीय एक बच्चे की। इस बच्चे की माता-पिता नहीं हैं और यह बच्चा अपने मामा के पास रहता है, उनकी भी आर्थिक हालत बेहद खस्ता है। करीब एक माह पहले प्रकाश के सिर में चोट लग गई। समय पर इलाज नहीं हुआ तो चोट के चलते इनफेक्शन हो गया और सिर में कीड़े तक पड़ गए। झोपड़ियों में ही रहने वाले बच्चे भी दूरी बनाकर रहते थे। बच्चा दर्द से छटपटाता रहता, लेकिन मरहम-पट्टी की छोड़िए हाल भी कोई पूछने वाला नहीं था। कुछ दिनों पहले ही जब सदभावना के अमित ग्रोवर अपनी टीम के साथ झोपड़ पट्टियों में पहुंचे तो बच्चे के मामा को किसी ने मददगार पहुंचने की खबर दी तो मामा आंखों में आंसू लिए सामने खड़ा हुआ। बच्चे की पूरी स्थिति बताई। उस दौरान बच्चा बेहोशी जैसी हालत में था और दर्द से छटपटा रहा था। ऐसे में फौरन ही बच्चे को इलाज के लिए डाॅ. मनोज सोनी जी और सजन लावट के पास ले लाया गया। ऐसे में दोनों ही बच्चे का नि:शुल्क इलाज करने का आश्वासन दिया।

खुद डाॅ. मनोज कहते हैं कि यदि समय पर मदद नहीं मिलती तो बच्चे के शरीर में भी इनफेक्शन फैल सकता था। दरअसल, बच्चे की सिर की स्किन भी बुरी तरह से डैमेज हो गई थी। इसलिए स्किन वाले चिकित्सक से भी इलाज कराया गया।

^मेरा तो एक ही कहना है कि वेलेटाइंन का असल मकसद तो तब पूरा होगा जब प्रत्येक जरूरतमंद तक मदद और प्यार मिले। इस बच्चे के स्वास्थ्य की सहायता के अलावा हमने इसका नाम प्रकाश रखा है और इसे अब पढ़ाएंगे भी।\\\'\\\' अमितग्रोवर, सदभावना संस्था।

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