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घबराहट और बेचैनी में दवाई का विकल्प सीताफल

5 वर्ष पहले
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घबराहटऔर बेचैनी यानि एन्जायटी होने पर जितना काम एलोपैथी दवा करती है, इसके समान ही फायदा सीताफल का सेवन करने से भी होता है। सीताफल का सेवन करने से दिमाग शांत हाेता है तो मन संतुलित अवस्था में आने लगता है। इस तथ्य को शोध के माध्यम से साबित कर लिया गया है।

जीजेयू के फार्मास्यूटीकल विभाग में पीएचडी कर रहे स्कॉलर कैलाश शर्मा ने एक रिसर्च स्टडी में यह पाया है कि सीताफल में वो सभी तत्व मौजूद हैं, जो एन्जायटी को कम करने के लिए ली जाने वाली दवा में होते हैं। साथ ही दवा तैयार करने के लिए कृत्रिम तत्वों का समावेश किया जाता है, लेकिन सीताफल में वो तत्व पहले से मौजूद होते हैं। सीताफल एन्जायटी में किस तरह से काम करता है इसके लिए शोध कर्ता ने चूहों पर परीक्षण किया है। रिसर्च की स्टडी को देखते हुए इसके प्रकाशन के लिए स्वीकृति भी मिल गई है। जीजेयू कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि विवि में किए जाने वाले शोधकार्य मानकों पर खरे उतर रहे हैं, इसलिए शोधार्थी बधाई के पात्र हैं।

सीताफल फाइल फोटो।

एंजायटी पर शोध करने वाले जीजेयू के शोधार्थी कैलाश शर्मा।

ये है एनिक्सिटी, इसलिए हानिकारक

शोधार्थीने बताया कि जब हम ऊंचाई से, पानी में से या किसी जानवर से डरते हैं तो घबराहट पैदा होती है। यह एक विकार होता है जिसे एनेक्सिटी कहते हैं। साक्षात्कार या किसी नए व्यक्ति या नई जगह जाने के दौरान घबराना भी इसी में शामिल है। यह एक बीमारी है, जो हानिकारक है, क्योंकि घबराहट और बेचैनी की स्थिति में हम निर्णय लेने की क्षमता खो देते हैं, साथ ही इससे किसी तरह का अटैक भी सकता है। और हाथ आए अवसर भी छूटने का भय रहता है।

सीताफल में ये तत्व हैं मौजूद

सीताफलमें पी कोमुरिक एसिड होता है जो ब्रेन में गाबा रिस्पेटर को एक्टिवेट कर देता है, इससे एनेक्सिटी ठीक होती है। प्रोटोकैटेक्यूिक विटामिन-सी न्यूट्रोप्रोटेक्टिव हैं और एंटीऑक्सिडेंट होते हैं। गेलिक केफिक एसिड निट्रिजिक सिस्टम में आई नोज और एन नोज को बंद कर देता है जिससे एनेक्सिटी ठीक होती है। सीताफल को मान्यता के अनुसार पवित्र फल भी माना जाता है और इसे पूजा पाठ के दौरान प्रयोग किया जाता है। शोधार्थी कैलाश शर्मा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि कई जगह यह फल महंगा तो कहीं पर कम रेट में भी मिल जाता है।

इस तरह से की स्टडी, ये निष्कर्ष

शोधार्थीकैलाश शर्मा ने बताया कि सीताफल पर स्टडी करने के लिए अलग-अलग मॉडल बनाए गए। जिसमें 6-6 चूहों के पांच ग्रुप बनाए गए। इसके बाद इस तरह की स्थिति पैदा की गई जिससे चूहों में घबराहट और तनाव बढ़ जाए। एन्जायटी की स्थिति में चूहे किस तरह से व्यवहार करते हैं और मॉडल में किस तरह सुरक्षित रहने के लिए छुपते हैं, इसकी मेजरमेंट की गई। इसमें एक ग्रुप को सिर्फ पानी, दूसरे ग्रुप को बाजार में मिलने वाली ड्रग्स और तीसरे ग्रुप को सीताफल के जूस में पानी मिलाकर 3 प्रतिशत, चौथे ग्रुप को 6 प्रतिशत और पांचवें ग्रुप को 9 प्रतिशत वॉल्यूम की डाइट दी गई। इस दौरान देखा गया कि बाजार में मिलने वाली डायजापाम ड्रग्स और सीताफल के जूस लेने वाले चूहे के व्यवहार में कितना फर्क है, तो पाया कि दोनों का असर एक बराबर ही है।

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