इस बार मनाएं ईको फ्रेंडली दिवाली

4 वर्ष पहले
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आंकड़ों में समझिए स्थिति

तमाम प्रयासों के बाद भी बढ़ा प्रदूषण

प्रदूषणनियंत्रण विभाग और प्रशासन की लाख कोशिशों के बावजूद प्रति वर्ष दीपावली पर पटाखों से निकलने वाली गैसें अपना जहरीला असर छोड़ जाती हैं। प्रत्येक वर्ष दीवाली से पहले ही विभागीय अधिकारी सार्वजनिक स्थानों, स्कूलों में लोगों को कम ध्वनि और अधिक धुंआ छोड़ने वाले पटाखे ही प्रयोग में लाने के लिए कहते हैं, मगर फिर भी यह आंकड़ा कम नहीं हो रहा। ऐसे में इस वर्ष भी कुछ इसी प्रकार की जागरूकता लोगों तक पहुंचाई जा रही है।

2016 33.66माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर

201539माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर

2016 21.6माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर

201519.1माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर

2016 325.2(आरएसपीएम)

2015161.2(आरएसपीएम)

वर्ष आरएसपीएम एसपीएम एसओ2 एनओ2

2015

दिवालीके दिन 161.2 179.5 39 19.1

दिवाली से पहले 118 140.2 7.6 9.16

2016

दिवालीके दिन 325.2 389.3 33.66 21.6

दिवाली से पहले 579 689.3 26 30

नोट- आंकड़े माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर में हैं।

{ दिवाली पर प्रयोग होने वाले पटाखों में सबसे अधिक ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण फैलता है, तो ऐसे में इस बार दिवाली पर शोर करने वाले ईको फ्रेंडली पटाखों का प्रयोग करें।

{ अपने कार्यालय, स्कूल, दोस्तों, रिश्तेदारों को भी ईको फ्रेंडली दिवाली मनाने के लिए शपथ दिलाएं, क्योंकि पहली शुरुआत आप के घर से होगी। दीपावली पर घरों में मिट्‌टी के दीयों का प्रयोग करें।

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