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10 लाख से ज्यादा खर्च नहीं कर पाएंगी पंचायतें

5 वर्ष पहले
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पंचायतीराज विभाग में विकास कार्य कराने के लिए सरकार ने पहली बार कई बदलाव किए हैं। अब पंचायतें अपने स्तर से 10 लाख रुपये तक ही खर्च कर सकेेंगी। इससे अधिक बजट के कार्य पंचायती राज विभाग अपने स्तर से ई-टेंडरिंग से कराएगा। वहीं, 20 लाख रुपये से अधिक रकम के कार्यों की निगरानी थर्ड पार्टी करेगी।

पंचायत चुनाव के बाद विकास कार्य में गड़बड़ियों पर लगाम लगाने के लिहाज से बदलाव किए हैं। दरअसल, अभी तक विकास कार्यों का बजट पंचायतों के ग्राम सचिव सरपंच के ज्वाइंट खाते में ही जाता था, मगर अब सिर्फ 10 लाख रुपये तक ही पंचायतों के खाते में सरकार सीधे भेजेगी। पंचायतों में इससे अधिक रकम के लिए विभाग को ई-टेंडर से विकास कार्य कराने होंगे। थर्ड पार्टी भी विकास कार्यों की जांच करने सीधे चंडीगढ़ से आएगी।

तीन असर : पंचायतोंको दिक्कत होगी, अफसरों की मनमानी बढ़ सकती है और बजट अटकने से कामों में देरी होगी।

इस पहल के तीन फायदे : पंचायतेंमनमानी नहीं कर पाएंगी, विकास कार्यों में पारदर्शिता आएगी और विभाग निगरानी रखेगा तो गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई हो सकेगी।

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बजट को किश्तों में नहीं तोड़ सकते

पंचायतीराज विभाग के एसई ईश्वर सिंह कहते हैं कि राज्य सरकार जो भी बजट जारी करती है, वह प्रशासनिक मंजूरी के बाद ही मिलता है। ऐसे में बजट को अपने मुताबिक पंचायत हों या फिर विभाग कोई भी किश्तों में इस्टीमेट नहीं बना सकता। उदाहरण लें कि 11 लाख रुपये किसी पंचायत की गलियों के लिए मंजूर हुए तो पंचायत चाहकर भी इस रकम को दो टुकड़ों में विभाजित नहीं कर सकतीं।

^विकास कार्य कोई भी कराए हमें कोई परेशानी नहीं, लेकिन हमारी तो एक ही बात है कि पंचायतों में जनता के मुताबिक काम होने चाहिए।\\\'\\\' मनोजशर्मा, सरपंच, ढंढ़ूर

^अभी तक पंचायतों के ज्वाइंट खाते में बजट भेजा जाता था, लेकिन अब सिर्फ 10 लाख रुपये तक पंचायतों के खाते में आएंगे। इससे अधिक रकम के लिए ई-टेंडर होंगे तो 20 लाख से बड़े बजट वाले कार्यों के लिए सरकार की ओर से तय थर्ड पार्टी विकास कार्यों की जांच करेगी।’’ कुलबीरसिंह, एक्सईएन, पंचायती राज विभाग।

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